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Duration2:59

सांसों का आंगन

पंडित मेघ शर्मा

हिंदुस्तानी शास्त्रीय

About

यह रचना एक गहरे विरह भाव को समर्पित है, जिसमें तानपुरा के निरंतर ड्रोन और तबले के जटिल ताल चक्र का अद्भुत सामंजस्य है। राग आधारित मेलोडी और मानवीय स्वरों की सूक्ष्म गमक इस शास्त्रीय कृति को एक आध्यात्मिक और भावुक गहराई प्रदान करती है।

Lyrics

शिव आकर दे लाओंगा थोड़ा थोड़ा बचाँगा कौड में आज रहकर तुझे बाटकें बसाओंगा आखों में मसाना दे जीवन का सुवाना है अरजियों का पुन्हा दे तुझे चूमने दिखाओंगा अरजियों की पुजारी दे खुशियों की हवाओं में ये सावन मेरी सास में मेरा नैनों से समाओं दे शिव आकर दे लाओंगा थोड़ा थोड़ा बचाँगा तेरे पीछे पीछे अंधेरों में जाओंगा बातें तेरी सुनकर सद्धमाना पुखाओंगा अरजियों का पुन्हा दे तुझे चूमने दिखाओंगा शिव आकर दे लाओंगा थोड़ा थोड़ा बचाँगा कौड में आज रहकर तुझे बाट के मसाओंगा आखों में मसाना दिल जीवन का सुवाना है शिव आकर दे लाओंगा थोड़ा थोड़ा बचाँगा कौड में आज रहकर तुझे बाट के मसाओंगा आखों में मसाना दिल जीवन का सुवाना है शिव तेरे पीछे पीछे अधरों में जाना हुँगा बाते तेरी सुनकर सधमाना बुखाँगा

सांसों का आंगन

पंडित मेघ शर्मा

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