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Duration3:25

शून्य की खोज

पंडित अद्वैतानंद व्यास

हिंदुस्तानी शास्त्रीय

About

यह रचना तानपुरा के गहरे ड्रोन और तबले के जटिल ताल चक्रों पर आधारित एक दार्शनिक यात्रा है। राग आधारित मेलोडिक संरचना और स्वर की सूक्ष्म बारीकियों के माध्यम से आत्म-साक्षात्कार का भाव उत्पन्न किया गया है।

Lyrics

alap

शून्य के इस पार मैं, उस पार तुम होसाँसों की डोरी में उलझा, यह कैसा भ्रम होअस्तित्व की खोज में, खुद ही खो गया हूँमैं क्या हूँ, क्यों हूँ, बस यही सोचता हूँ

jor

समय की रेत हाथों से फिसलती जाएपरछाईं मेरी मुझसे सवाल करती जाएक्या ये काया है सत्य, या केवल माया का जालउलझनों में बीता हर एक पल, हर एक सालभीतर की इस प्यास को, कौन बुझाएगाजो मौन है भीतर, वो कब तक गुनगुनाएगा

gat

मिट्टी से उपजे हम, मिट्टी में मिल जाना हैअंजान राहों पर, फिर से चल पड़ना हैन आदि है, न अंत है, बस एक बहाव हैइस जीवन के दरिया में, तैरता एक नाव हैहकीकत की तलाश में, आँखें थक जाती हैंसपनों की दुनिया में, रूहें बस जाती हैं

jhala

कौन मैं, कौन तू, ये भेद मिटाना हैखुद को खोकर, खुद को ही पाना हैप्रश्नों के घेरे में, जीवन ये कैद हैमुक्ति की राह में, बस एक ही जिद हैसत्य का उजाला, मन में जगाना हैअंधियारे रास्तों को, पीछे छोड़ आना है

tihai

स्वयं की खोज में, स्वयं को ही खो दियास्वयं की खोज में, स्वयं को ही खो दियास्वयं की खोज में, स्वयं को ही खो दिया

शून्य की खोज

पंडित अद्वैतानंद व्यास

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