बाट जोहती आँखें
पंडित अनुराग त्रिवेदी
हिंदुस्तानी शास्त्रीय
About
यह रचना एक गहरे विरह भाव को समर्पित है, जिसमें तानपुरा की स्थिर गूँज और तबले के जटिल ताल चक्रों का मेल है। राग आधारित मेलोडी और गायक के सूक्ष्म गमक इस शास्त्रीय बंदिश को एक आध्यात्मिक और भावुक गहराई प्रदान करते हैं।
Lyrics
सांसों के इस खाली आंगन मेंतेरी यादों का साया हैकब से बाट जोह रही हैं आंखेंतू क्यों अब तक न आया है
भीगी पलकों पर ठहरी हैएक अनकही सी दास्तांमेरे सूनेपन की हर आहट मेंबस तेरा ही है नाम जवांतू जो नहीं तो सब फीका हैतू जो नहीं तो सब वीरान
सावन की बूंदें जब गिरती हैंतेरी खुशबू संग लाती हैंबीते लम्हों की वो बातेंमुझको हर पल तड़पाती हैंनैनों के दर पे खड़ी हूँ मैंकब से राहें निहारती हूँखुद से ही मैं हार रही हूँतुझको ही बस पुकारती हूँ
आजा कि अब तो सबर न होआजा कि दिल को खबर न होप्यासी रूह की ये तपिश बढ़ेतेरी राहों में ये उम्र कटेआजा कि अब तो सबर न हो
तू ही मेरी इबादत हैतू ही मेरी चाहत हैतू ही मेरी इबादत हैतू ही मेरी चाहत हैतू ही मेरी इबादत हैतू ही मेरी चाहत है
बाट जोहती आँखें
पंडित अनुराग त्रिवेदी
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