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Duration3:16

बाट जोहती आँखें

पंडित अनुराग त्रिवेदी

हिंदुस्तानी शास्त्रीय

About

यह रचना एक गहरे विरह भाव को समर्पित है, जिसमें तानपुरा की स्थिर गूँज और तबले के जटिल ताल चक्रों का मेल है। राग आधारित मेलोडी और गायक के सूक्ष्म गमक इस शास्त्रीय बंदिश को एक आध्यात्मिक और भावुक गहराई प्रदान करते हैं।

Lyrics

alap

सांसों के इस खाली आंगन मेंतेरी यादों का साया हैकब से बाट जोह रही हैं आंखेंतू क्यों अब तक न आया है

jor

भीगी पलकों पर ठहरी हैएक अनकही सी दास्तांमेरे सूनेपन की हर आहट मेंबस तेरा ही है नाम जवांतू जो नहीं तो सब फीका हैतू जो नहीं तो सब वीरान

gat

सावन की बूंदें जब गिरती हैंतेरी खुशबू संग लाती हैंबीते लम्हों की वो बातेंमुझको हर पल तड़पाती हैंनैनों के दर पे खड़ी हूँ मैंकब से राहें निहारती हूँखुद से ही मैं हार रही हूँतुझको ही बस पुकारती हूँ

jhala

आजा कि अब तो सबर न होआजा कि दिल को खबर न होप्यासी रूह की ये तपिश बढ़ेतेरी राहों में ये उम्र कटेआजा कि अब तो सबर न हो

tihai

तू ही मेरी इबादत हैतू ही मेरी चाहत हैतू ही मेरी इबादत हैतू ही मेरी चाहत हैतू ही मेरी इबादत हैतू ही मेरी चाहत है

बाट जोहती आँखें

पंडित अनुराग त्रिवेदी

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