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Duration3:04

विरह की अग्नि

पंडित विश्व मोहन शर्मा

हिंदुस्तानी शास्त्रीय

About

यह रचना एक गहन हिंदुस्तानी शास्त्रीय बंदिश है, जिसमें तानपुरा की गूंज और तबले के जटिल ताल चक्रों का मेल है। राग आधारित मेलोडिक संरचना और भावपूर्ण आलाप विरह की वेदना को अत्यंत मार्मिकता के साथ प्रस्तुत करते हैं।

Lyrics

युग जन्मन सीना अमोट मनिला नहीं पाना तुम्हारे प्रिया वियो ना दिखाई दोनी मीच तारो तमाशा नाही प्रिया जरा ना आपर्त हो रहो ना तुम जुरा ना तुम जुरा ना तुम अटल मन हो रासा नाही तुम्हारे प्रिया वियो ना दिखाई दोनी मीच तारो तमाशा नाही प्रिया जरा ना आपर्त हो रहो ना तुम जुरा ना तुम जुरा ना तुम अटल मन हो रासा नाही तुम्हारे प्रिया योग जन्म ना सीना अमोट मन हिला हिला ना हिपाना तुम्हारे प्रिया वियो ना दिखाई दोनी मीच तारो तमाशा नाही प्रिया जरा ना आपर्त हो रहो ना तुम जुरा ना तुम जुरा ना तुम अटल मन हो रासा नाही तुम्हारे प्रिया योग जन्म ना सीना अमोट मन हिला हिला ना हिपाना तुम्हारे प्रिया जरा ना आपर्त हो रहो ना तुम्हारे प्रिया जरा ना तुम जुरा ना तुम जुरा ना तुम

विरह की अग्नि

पंडित विश्व मोहन शर्मा

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विरह की अग्नि by पंडित विश्व मोहन शर्मा | EchoLoRA: Generate a Song with AI