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Duration3:34
मिट्टी का काया
पंडित मृत्युंजय दास
हिंदुस्तानी शास्त्रीय
About
यह रचना राग दरबारी की गंभीरता में रची गई है, जिसमें तानपुरा की गूंज और तबले के विलंबित ताल का अद्भुत मेल है। गायकी में गमक और सूक्ष्म श्रुतियों का प्रयोग मानव नश्वरता के दार्शनिक भाव को गहराई से व्यक्त करता है।
Lyrics
Satsang with Mooji Satsang with Mooji Satsang with Mooji Satsang with Mooji Satsang with Mooji Satsang with Mooji Satsang with Mooji
मिट्टी का काया
पंडित मृत्युंजय दास
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