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Duration2:51

खुद का मुसाफिर

आर्यन अंबर

इंडी-पॉप

About

एक जीवंत इंडी-पॉप ट्रैक जिसमें एकॉस्टिक गिटार की मधुर धुन और आधुनिक सिंथेसाइज़र का संतुलित मिश्रण है। यह गीत आत्म-खोज और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की यात्रा को एक स्पष्ट और प्रेरणादायक स्वर में दर्शाता है।

Lyrics

सहगिन जो तिष्टे में तेरों जुकता हूँ शीशे में अपने परछाएं को पूछता हूँ पूराने पन्नों में दबी थी जो कहानी वो हासी जो कहीं पीछे छूट गई थी बुरानी भीड में चलते चलते खुद से विच्छड गया था किसी और की धुनों पर मैं नाचता रहा था पर अब खामशीयों से बाते करने लगा हूँ मैं अपनी ही लहानी तैरों पर अब तैरने लगा हूँ धुन्द चंट रही है धीरे धीरे अबन्य सवेरा है अपना ही रब मैं फुद को पहचान रहा हूँ आज नया है फलसफा नया में जज बिंजरे से निकला पंची हूँ मैं अब अपनी ही उडानों का मालिक हूँ अब जीने का धंग ब� मेरा फुद में ही मुकम्मल है बस सेरा वो रास्ते जो कभी डराते थे मुझको अब वो बुलाते हैं अपना समझने को मुझको गतियों के बुज से अब मैं आजाद हूँ अपनी ही मंजलों का मैं खुद उस्ताद हूँ जो कत कंधेरा था वो सितारा बन गया मुझ में ही � भलकर मैं दोबारा बन गया मैं खुद को बहचान रहा हूँ आज नया है फलस्फा नया मीजा चुट बिंजरे से निकला पंची हूँ मैं अब अपनी ही उडानों का मालिक हूँ अब जीने का धम बदल गया है मेरा फुद में ही मुकम्मल है बस सेरा ना किसी की बंदिर ना अब शांत हुआ है खुद से मेरा आज मिलन हुआ है मैं खुद को बहचान रहा हूँ आज नया है फलस्फा नया मीजा चुट बिंजरे से निकला पंची हूँ मैं अब अपनी ही उडानों का मालिक हूँ अब जीने का धम बदल गया है मेरा फुद में ही मुकम्मल है बस सेर हाँ मैं मिल गया हूँ फुद में ही खिल गया हूँ अब कोई शिकायत नहीं कुछ से बड़ी कोई इनायत नहीं मैं मिल गया मिल गया हूँ सुत्त जितियों सुत्त जितियों सुत्त जितियों

खुद का मुसाफिर

आर्यन अंबर

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खुद का मुसाफिर by आर्यन अंबर | EchoLoRA: Generate a Song with AI