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Duration3:19

विरासत की धुन

आकाश और ढोलक ब्रिगेड

चटनी

About

यह गाना पारंपरिक भोजपुरी लोक संगीत और आधुनिक सोका लय का एक जीवंत संगम है। इसमें ढोलक की थाप और ढंटाल की खनक के साथ एक ऊर्जावान इलेक्ट्रॉनिक बीट का उपयोग किया गया है, जो पुरखों की विरासत को समर्पित है।

Lyrics

धीनक धीनक धीनक धीनक धीनक धीनक सब नाचो खुशिया मनाओ अपनी मिट्टी की महको आज जगाओ मेरे दादाजी की आँखों में जो चमक्खी वही आज मेरी हर धड़कन में धमक्खी पुराने दिनों की वो मिखी सी आदे निभाए चले हम वो सारे वादे हाथों में हाथ लेके सब सा चलो पुर्खों के साए में आज जी के तो देखो ये विरस्त है अपनी वो इसे दिल से लगाओ धेटनों में अपनी ये धुन तुम बसाओ सची है महफिल खुशियों का मिला कोई भी यहां न रहे अप अकेला जुनके नाचो हीरी कहाना कहानी पिड़िया बदलती है बड़ रीत नहीं बदलती सूरज भी जैसे फिरसे फिरसे है भलती जबू चड़े है ये उचा है पेड़ खुशियों से भर जाए आज हर मोड़े ये विरसत है अपनी इसे दिल से लगाओ धेटनों में अपनी ये धुन तुम बसाओ सची है महफिल खुशियों का मिला कोई भी यहां न रहे अब अकेला जुनके नाचो हीरी कहाना पिड़िया बदलती है पड़े रीत नहीं बदलती सूरज की जैसे फिरसे फिरसे है धलती है जबू चड़े है ये उचा है पेड़ खुशियों से भर जाए आज हर मोड़े ये विरसत है अपनी इस दिल से लगाओ धक्नों में अपनी ये धुन तुम बसाओ सची है महफिल खुशियों का मिला कोई भी यहां न रहे अब अकेला जुनके नाचो धिनत धिनत धीतु धिनत धिनत धीतु धिनत धीतु

विरासत की धुन

आकाश और ढोलक ब्रिगेड

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