चेतना का उदय
दीपांकर दास
Devotional
About
यह रचना राग आधारित मधुरता और तबला-हारमोनियम के पारंपरिक वाद्ययंत्रों के मेल से बनी है। इसमें आध्यात्मिक जागृति को दर्शाते हुए एक शांत और ध्यानमग्न वातावरण का निर्माण किया गया है, जहाँ स्वर-प्रधान गायन और मंजीरे की लयबद्ध ध्वनि मन को शांति प्रदान करती है।
Lyrics
अंधियारे मन में एक दीप जला हैखोई हुई राहों का पता मिला हैभीतर की हलचल अब शांत हुई हैचेतना की नई सुबह का रंग खिला है
सांसों की माला में नाम पिरोयाखुद को खोजने में मैं खुद को ही खोयाबेचैन लहरें अब किनारा पा गईंजो सोया था मन वो आज जाग सा गयामिट गई धुंध सारी, खुल गई ये आँखेंअंदर के आईने में सच की झलक है
- सत्य का प्रकाश है
- प्रेम का निवास है
- सब उसी का अंश है
- यही जीवन का सार है
उठ रही है लहर, बह रही है धारामिट गया है भेस, मिल गया किनाराशून्य से उठा है एक नया ही नादहृदय के द्वार पर दस्तक है आजखुली है खिड़की, बह रही है हवामिट गया हर दर्द, मिल गई दवा
बाहर का शोर अब मौन सा लगताभीतर का एकांत अब गीत सा लगताजो कभी थे बंधन, वो राख हो गएमिट्टी के पुतले अब आकाश हो गएन कोई दूरी, न कोई अब फासलाखुद से ही मेरा ये रूबरू सिलसिला
जाग गया भाव, मिट गई हर प्यासअंदर ही है मेरा प्रभु का निवासअब कहीं न जाना, अब कहीं न रुकनाबस इसी नूर में सदा ही है झुकनासदा ही है झुकना।
चेतना का उदय
दीपांकर दास
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