मिटा दे मुझे
नित्य चैतन्य
Devotional
About
यह रचना राग यमन पर आधारित एक शांत भक्ति गीत है, जिसमें हारमोनियम और तबले की प्राकृतिक ध्वनियाँ अहंकार के विसर्जन को दर्शाती हैं। गायन शैली ध्यानपूर्ण है, जो श्रोता को आत्म-साक्षात्कार की गहराई में ले जाती है।
Lyrics
मैं कौन हूँ, ये खोज मिट जाएसारे भ्रम के बंधन, आज टूट जाएंभीतर का ये शोर, अब थमने लगा हैमिट रहा मैं, वो मिलने लगा है
अहंकार की ये दीवारें, गिर रही हैं धीरे-धीरेमिट रही हैं परछाइयां, जो थीं मेरे घेरे-घेरेमैं और मेरा का ये खेल, अब पुराना हो गयातेरी ज्योति में खोकर, मैं बेगाना हो गयान कोई नाम बाकी, न कोई पहचान हैबस तेरी रजा में, मेरी हर एक आन है
मिटा दे मुझे, ओ मेरे मीत
बना दे मुझे, तेरी ही रीत
बुझा दे मुझे, ये अहंकार का दीया
जगा दे मुझे, जो तूने है दिया
बूँद जब सागर में जाकर, खुद को खो देती हैवो खुद सागर बनकर, फिर अमर हो लेती हैमैं भी मिटाकर खुद को, तुझमें समाया हूँअस्तित्व के इस पार, मैं घर अपना पाया हूँये देह की सीमाएं, अब व्यर्थ लगती हैंतेरी करुणा की धाराएं, अब अर्थ लगती हैं
मैं शून्य हुआ, तू पूर्ण हुआमैं विलीन हुआ, तू संपूर्ण हुआसब मिट गया, बस तू ही तू हैसब मिट गया, बस तू ही तू है
मिटा दे मुझे
नित्य चैतन्य
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