मन में जगी आत्मज्योति
आत्मानंद शास्त्री
Devotional
About
यह भजन राग-आधारित माधुर्य और पारंपरिक वाद्ययंत्रों जैसे तबला और हारमोनियम का एक सुंदर मिश्रण है। इसमें स्वर-प्रधान रचना के साथ प्राकृतिक ध्वनिक ताल का उपयोग किया गया है, जो एक शांत और आध्यात्मिक वातावरण बनाता है।
Lyrics
अंधियारे मन में एक जोड़ी जगी है सोई हुई आत्माज फिर से ठगी है बाहर की दुनियाब फिकी सी लागे भीतर का सूरज मैनों में जागे तब तक मैं भटका था माया के जाल में उलज़ा हुआ था मा जूठे खयाल में धूर थी मेरी रूआ के आईने पहरे पर पर राज रोशनी गेरी है मेरे ठीकाने पर जागू थी है चेतना मिट गई सारी वेदना खुल गए अब तवार से सब मिल गया संसार अब एक नई लहर सी सिने अब मेरे ही जो था धूरा वो आज पूरा हुए अजनान का बादल लब को आरा हुआ है परमात्मा की जलब अगहर दिखती जैसे कोई माला प्रेम की बिखरी धूल गए सब पापा मिल गया है आपा मिल गया है आपा शांति का ये सागर है शांति का ये सागर है दिश्वर ही उजागर है दिश्वर ही उजागर है सासों में बसी यो बिख नई ताई ताण है परामंद का यही तो विधा है जाग गया हूँ मैं जाग गई है रूहा मिट गई है मेरी सारी की साही जो अब मैं हूँ और उस मेरा प्रभू
मन में जगी आत्मज्योति
आत्मानंद शास्त्री
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