अहं का अंत
आर्यम देव
Devotional
About
यह भजन राग आधारित धुन और पारंपरिक तबला व हारमोनियम की संगत के साथ अहंकार के विसर्जन की यात्रा को दर्शाता है। इसमें एक शांत और ध्यानमग्न गायन शैली का उपयोग किया गया है जो श्रोता को आत्म-साक्षात्कार की गहराई में ले जाती है।
Lyrics
मैं कौन हूँ, ये खोज मिट जाएसारे भ्रम के बंधन ये टूट जाएंअहं की ये दीवारें गिर रही हैंतेरी ज्योति में सब पिघल रही हैं
मैं और मेरा का ये जाल पुरानामिटने लगा है मेरा ये ठिकानासाँस की डोर अब तुझसे जुड़ी हैमेरी हस्ती अब तुझमें खड़ी हैनाम मेरा बस एक शोर सा हैतेरी ख़ामोशी में सब भोर सा है
तू ही सत्य है
मैं तो बस छाया
तू ही सत्य है
मैंने खुद को पाया
बूँद जब सागर में खो जाती हैवो खुद सागर ही तो हो जाती हैअहं का ये भार अब हल्का हुआतेरी करुणा का ये फलका हुआसब कुछ मिटा के तुझमें समायाशून्य में मैंने अपना घर पाया
न कोई अपना, न कोई परायाअहं के अंधेरे को मैंने मिटायाआँखें खुलीं तो तू ही तू हैमिट गया मैं, अब बस तू ही तू हैन कोई इच्छा, न कोई प्यास हैतेरी रज़ा में ही मेरा वास है
तू ही सत्य है
मैं तो बस छाया
तू ही सत्य है
मैंने खुद को पाया
मिट गई मैं, मिट गया तूअब बचा बस एक ही सत्यअहं का अंत, तेरा आरंभशांति ही शांति, बस तू ही तूशांति ही शांति, बस तू ही तू
अहं का अंत
आर्यम देव
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