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Duration3:08

अहं का अंत

आर्यम देव

Devotional

About

यह भजन राग आधारित धुन और पारंपरिक तबला व हारमोनियम की संगत के साथ अहंकार के विसर्जन की यात्रा को दर्शाता है। इसमें एक शांत और ध्यानमग्न गायन शैली का उपयोग किया गया है जो श्रोता को आत्म-साक्षात्कार की गहराई में ले जाती है।

Lyrics

intro

मैं कौन हूँ, ये खोज मिट जाएसारे भ्रम के बंधन ये टूट जाएंअहं की ये दीवारें गिर रही हैंतेरी ज्योति में सब पिघल रही हैं

verse

मैं और मेरा का ये जाल पुरानामिटने लगा है मेरा ये ठिकानासाँस की डोर अब तुझसे जुड़ी हैमेरी हस्ती अब तुझमें खड़ी हैनाम मेरा बस एक शोर सा हैतेरी ख़ामोशी में सब भोर सा है

call-and-response
तू ही सत्य है

तू ही सत्य है

मैं तो बस छाया

मैं तो बस छाया

तू ही सत्य है

तू ही सत्य है

मैंने खुद को पाया

मैंने खुद को पाया

crescendo

बूँद जब सागर में खो जाती हैवो खुद सागर ही तो हो जाती हैअहं का ये भार अब हल्का हुआतेरी करुणा का ये फलका हुआसब कुछ मिटा के तुझमें समायाशून्य में मैंने अपना घर पाया

verse

न कोई अपना, न कोई परायाअहं के अंधेरे को मैंने मिटायाआँखें खुलीं तो तू ही तू हैमिट गया मैं, अब बस तू ही तू हैन कोई इच्छा, न कोई प्यास हैतेरी रज़ा में ही मेरा वास है

call-and-response
तू ही सत्य है

तू ही सत्य है

मैं तो बस छाया

मैं तो बस छाया

तू ही सत्य है

तू ही सत्य है

मैंने खुद को पाया

मैंने खुद को पाया

outro

मिट गई मैं, मिट गया तूअब बचा बस एक ही सत्यअहं का अंत, तेरा आरंभशांति ही शांति, बस तू ही तूशांति ही शांति, बस तू ही तू

अहं का अंत

आर्यम देव

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