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Duration2:54

शहर का धागा

शहर के साये

इंडियन रॉक

About

यह ट्रैक भारी डिस्टोर्टेड इलेक्ट्रिक गिटार रिफ्स और पारंपरिक सितार की धुन का एक शक्तिशाली मिश्रण है। इसमें शहरी संघर्ष की वास्तविकता को दर्शाते हुए तीव्र ड्रम बीट्स और भावनात्मक गायन का प्रयोग किया गया है।

Lyrics

intro

धुएँ में लिपटी ये सुबह की लालीहाथों में खालीपन, जेबें हैं खालीसड़कों की भीड़ में खोया सा चेहराअपना ही साया यहाँ लगता है गहरा

verse

लोहे की चादरों में सिमटा ये डेराऊंची इमारतों ने छीना सवेराभीड़ की धक्का-मुक्की में अपना वजूदखोजना है मुश्किल, सब कुछ है महदूदगाड़ियों का शोर, धुएँ का ये जालबदला नहीं है यहाँ अपना ये हाल

pre-chorus

सपनों के बोझ से झुकती हैं कमरेंदबी हुई आहें, बंद ये कमनेंघड़ी की सुइयों पर भागती जिंदगीक्या यही है सच, क्या यही बंदगी?

chorus

ये शहर है या कोई उलझा हुआ धागाजो भी यहाँ आया, बस दौड़ता ही भागापत्थरों के सीने में धड़कन कहाँ है?अपनों की भीड़ में अपना ही धुआँ हैउठो, तोड़ो इस खामोश पिंजरे कोजीना है तो छोड़ो कल के इस घेरे को

verse

सिग्नल पे रुकती ये उम्र की रफ़्तारटूटे हुए वादे, आँखों में इंतज़ारमंजिल की तलाश में रास्ता ही खोयानींदों के बदले में बस दर्द ही बोयाकिराये की छतों पे ख्वाबों का बसेराअंधेरी रातों में उम्मीद का घेरा

bridge

शोर में भी एक शोर है अंदरउबलता है खून, जलता है मंज़रखामोश रहना अब और नहीं मुमकिनबदलाव के लिए लड़ना है मुमकिन

chorus

ये शहर है या कोई उलझा हुआ धागाजो भी यहाँ आया, बस दौड़ता ही भागापत्थरों के सीने में धड़कन कहाँ है?अपनों की भीड़ में अपना ही धुआँ हैउठो, तोड़ो इस खामोश पिंजरे कोजीना है तो छोड़ो कल के इस घेरे को

sitar-solo
outro

धुआँ छटेगा, सूरज निकलेगाकल का सवेरा फिर से बदलेगालड़ना है, बढ़ना है, थमना नहीं हैये शहर अपना है, झुकना नहीं हैहाँ, झुकना नहीं है।

शहर का धागा

शहर के साये

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शहर का धागा by शहर के साये | EchoLoRA: Generate a Song with AI