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Duration3:09

पत्थर का शहर

लोहे के पंख

इंडियन रॉक

About

यह ट्रैक भारी इलेक्ट्रिक गिटार रिफ्स और पारंपरिक तबला तालों का एक शक्तिशाली मिश्रण है। इसमें शहरी संघर्ष की भावनाओं को दर्शाते हुए कच्चा रॉक प्रोडक्शन और भावनात्मक गायन का उपयोग किया गया है।

Lyrics

शहर मेरा मेरी दुनिया है छेरों में तारे की देखो तो है बाहर लोहे की सलाखें ये उंची मारतें जूठे वादों की ये रोज की आदतें जेब में खाली पन और आखों में खाब मुसाफिर यहां सब खुद ही सवाल जवाब घड़ी के सूई पर नौडती है ये जिन्दगी ठक गई है छेरों फिर भी है बंदगी सड़कों पे दोड़ते बेनाम ये साहे मंजिल की तलाश में हम खुद को खो आये ये शहर है पत्तर का और हम फसाने लिखे हैं बस दर्द पुराने पिंजलाने पिंजले में कैजे उड़ने की चाहत तोटी है लड़ो और खुद को पहचानो ये शहर की आग में खुद को न मानो बीड में खोया पर मैं तना यहां कल की फिक्क में खो गया है जहां ट्रिनों की पट्टरी पे भागती है अमीदे मजबूरीों की ये पुरानी सी रसीदे मशीनों की तना हम चलते ही जाते स्खमों को अपने हम अंदर दबाते सड़कों पे दोड़ते बेना ये साए मंजल की तलाश में हम खुद को खो आए ये शहर है पट्थर का और हम फसाने लिखे हैं हाँ बस दर्द पुराने पिंजरे में क्या ये उड़ने की चाहत तोटी है लड़ो और खुद को बहचानो ये शहर की आग में खुद को ना मानो कंच के दर्वाजों के भी सच चुकता है अंधेरे कमरों में हर कोई जुकता है पर आग भी बाकी है सीने के भी तरबद लेंगे हम खुद अपना ये मुक्तर ये शहर है पत्थर का और हम फसाने लिखे हैं बस दर्द पुराने पिंजरे में क्या ये उड़ने की चाहत तोटी है लड़ो और खुद को बहचानो ये शहर की आग में खुद को ना मानो

पत्थर का शहर

लोहे के पंख

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पत्थर का शहर by लोहे के पंख | EchoLoRA: Generate a Song with AI