जड़ों का सफर
धरती धड़कन
Indian Rock
About
एक शक्तिशाली रॉक एंथम जो भारी इलेक्ट्रिक गिटार रिफ्स को पारंपरिक तबला और सितार की जटिल धुनों के साथ जोड़ता है। यह ट्रैक सांस्कृतिक पहचान और अपनी जड़ों की ओर लौटने की यात्रा को एक ऊर्जावान और प्रेरणादायक संगीत के माध्यम से दर्शाता है।
Lyrics
माइक चेंड शारकी सीधी में चेरे हजार हैं पैरे लरस दिरे आपनी के उतार हैं अलगी प्यार या पुरानी रादे दिवार पर टंगी तस्वीर बदली नहीं है मेरी अपनी है तक्दिर में अपनी जड़ों से जुना है मचा जो खो दिया था वो फिर से पाया हूँ हवाओं में खुली मेरी हीरू की पुकार डलते दाओर में भी मैं हूँ अपना पैरे दार ये मेरी रीत है ये मेरी रूहों की आवाज है जो वही आज का अगाजस है नकली मुखोटों के पीछे नपूगा नहीं नजमी जमी कभी जुबूगा नहीं मैं हूँ वही जो अपनी मिटी से जुड़ा है मैं हूँ वही जो तुपानों में भी खड़ा है डौड़ती सिंदगी में ठरना जरा सिखले बनी तुम्हे जिना तु सीखले पेरी रूहों का बोजन है यह तो भी रासत है मेरे वजुद की यही तो इबादत है असमन की उच्छा को चूना है मुझे पर जमी का रास्ता पुलना मेरी मुझे हवाओं में गुली मेरी ही रुकी बुकार डल्थ दार में भी मैं हूँ अपना पैरेदार यह मेरी रीत है यह मेरी रूहों की आवाज है जो भी आज का अगाजस है नकली मुखों तो के पीछे मैं पुंगा नहीं न जमी जमी कभी जुपूंगा नहीं मैं हूँ वही जो अपनी मिटी से जुड़ा है मैं हूँ वही जो तुपानों में भी खड़ा है शार की सीधी में चरे हजार है पैर अलरस दिये आपनी के उता है अलगी प्यार है पुरानी आदिन दिवार पर टंगी जस्वीर पद्दिली नहीं है मेरी अपनी है तक्दिर में अपनी जड़ों से गुना है मुझे प्रदमी का रास्ता बुलना नहीं मुझे हवाओं में गुली मेरी ही रूकी बुकार डलते दार में भी मैं हूँ अपना पैरेदार ये मेरी रीत है ये मेरी रूहों की आवाज है जो वही आज का रगार्जस है नतली मुखोटों के पीछे मैं पूँगा नहीं नजमी जमी कभी जूँगा नहीं मैं हूँ वही जो अ मच्चण मच्चण मच्चण मच्चण मच्चण मच्चण मच्चण
जड़ों का सफर
धरती धड़कन
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