जड़ों का शोर
आर्यावर्त रॉक कलेक्टिव
Indian Rock
About
यह ट्रैक एक शक्तिशाली रॉक फ्यूजन है जो भारी इलेक्ट्रिक गिटार रिफ्स को पारंपरिक तबला ताल और सितार की राग-आधारित धुन के साथ मिलाता है। इसकी ऊर्जा सांस्कृतिक पहचान की खोज को दर्शाती है, जिसमें रॉक वाद्ययंत्र और भारतीय लोक लय का एक गतिशील मेल है।
Lyrics
ये हावाई कहती है तू कहां से आया है नदियां पूछेती है तूने क्या पाया है मेरी जड़ों का ये शोर रगों में ताड़ता है मैं वो परिंदा हूँ जो पिंजरा ताड़ता है मेरी पैचान मेरी रूह का इना है रंग मेरा ये ढंग मेरा बस यही ठीकाना है शेर की भीर में खोड़ा मैं अपनी बोली भूल गया भेड की अंधी गोड में मैं अपनी तोली भूल गया पर आज फिर वो सुर जगे सीने के किसी कोने में वो माँ की लोरी यादा है मुझे कहीं खोने में ये हवाई कहती है तू कहां से आया है नदिया पूछती है तूने क्या पाया है मेरी जड़ों का ये शोर रगों में तोड़ता है मैं वो परिंदा हूँ जो पिंजरा तोड़ता है मेरी पहचान मेरी रूह का इना है रंग मेरा ये ढंग मेरा बस यही ठीकाना है सुन मौत सहस्तर पुराने का पत कौयों की गुलाबी इसे मिट्टी की रूपच मैं कल का काम ढूड़ता हूँ लादी की कहानियों में जो लेकिरे किंची थी उन अनके शब्दों के बीच मैं खुड़का मुकाम ढूड़ता हूँ ये हवाई कहती है तू कहां से आया है नदियां पूछती है तूने क्या पाया है मेरी जड़ों का ये शोर रगों में दड़ता है मैं वो परिंगा हूँ जो पिंजरा तूड़ता है मेरी पैचन मेरी रूँ काइना है रंग मेरा ये ढंग मेरा बस यही ठीका ना है
जड़ों का शोर
आर्यावर्त रॉक कलेक्टिव
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