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Duration3:44

دید کا سفر

شمس الہدیٰ

صوفیانہ موسیقی

About

یہ کلام ایک گہری روحانی تڑپ کی عکاسی کرتا ہے، جس میں ہارمونیم کے مسلسل ڈرون اور تبلے کی تھاپ پر تالیوں کی گونج شامل ہے۔ گائیکی میں طویل اور پر اثر میسمیٹک سریں استعمال کی گئی ہیں جو سننے والے کو ایک وجدانی کیفیت میں لے جاتی ہیں۔

Lyrics

मैं कुण वो क्या से आया ये राजे हस्ती किया है तलास जस की तही मुझे को वह नूर अजली किया है कदम कदम पे अकनियां थाने मेरा खूली के बद कू तो तना ही कम है मेरा मिन चल राहों अस राह पर जहां को नशन नहीं असफर जाद है जहां खुद हा काबी दमन नहीं अपती रीत पर चल कर मीन ने पियास को पाया हे बंदान को से मीन उसका जलू दिखाया है में तुम मसाफर हों अस दरका कोई ठकाना नहीं की असफाली में खुद कुमा नहीं फसानी फसान है यारब मचे अपनी जात सही मलदे मजमी चपे अस राज को तो खुद ही जगादे मैं कोई गईदे मका कौन है न कोई गईदे समामी जहाँ है मीरा दिहान कभी जलफून के साये नहीं मेरे हर अकमान भी मीने छोटा है दुन्या को अब तेरी तलबी काफी है मीर तो ही तो है सर्फ तो ही तो है सर्फ तो ही तो है मी तुम मसाफर हों उस दर का कोई थेकाना नहीं जी अस्वारी में खुद कुमा नहीं फसानी फसान है यारब मजे अपनी जात सही मला दिम जमी चपे इस राज को तो खुद ही जगादे तीरा नाम तो बागी है तीरी रामे तीरी रामे तीरी रामे

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شمس الہدیٰ

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