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Duration3:27

مٹی کی کایا

مہمانِ مٹی

صوفیانہ موسیقی

About

یہ صوفیانہ کلام انسانی فانی زندگی کی حقیقت کو بیان کرتا ہے، جس میں ہارمونیم کے گہرے ڈرون، طبلے کی تھاپ اور روایتی تالیوں کا استعمال کیا گیا ہے۔ گائیکی میں طویل اور پرکشش میسمیٹک سروں کا استعمال کیا گیا ہے جو سننے والے کو ایک روحانی کیفیت میں لے جاتے ہیں۔

Lyrics

मौत देख नहीं तो बाकी मौत क्या है दिल बोलता नहीं तो बाकी काह क्या है तल लेके पंदीरी के दास्ताना तज़ यह लम्हे राथ आना दिन जुदाई का पाहर का बत सुन सोए सोए और सो सोए खुशी को आँखों से खुशी को सांसों से सोए जान जान जोए सोए होए और सो सोए खुशी को आँखों से खुशी को सांसों से सोए उसकी चोरी भी बसताई का फुना फूल सौंदर का चोड़ भाई का सुने ये दुनिया का धरा में नहीं दुनिया दुनिया है जो पाणों की नहीं हो तो भी पाणों से फिरा है सपनों में जूठे सपनों से जरा जरा सांचार सजदा है जरा सजदा का जरा सजदा पर फारों से तोड़ा है ये जो दोनों से तोड़ा है पर शुरूर का शुरू ही जोड़ा है ये दुनिया का धरा में नहीं दुनिया है जो पाणों की नहीं हो तो भी पाणों से फिरा है स्वाचन बन के बाजूटे स्वाचन से बाज मिलेंगे ये दुनिया का धरा में नहीं दुनिया है जो पाणों की नहीं हो तो भी पाणों से फिरा है सपनों में जूठे सपनों से जरा जरा सांचार सजदा है सचार सजदा है जरा सजदा का जरा सजदा पर दिल से पूछूंगी आँखे मेरी बात मैं बता हूंगे फूल है मेरे आँखों में लाइका कोई तिखा हूंगे तकली के ही ठाप मुना मेरे कानों बे मैंने ना है कहा तुमने कहा है काज लेके बने थे पजलू के न थे पर है दुआना है पकड़ने स्वाश पे मैंने तब सुपुना जुला ये दुनिया का दर में नहीं दुनिया दुनिया है जो आँखे मेरे बात में लाइका कोई तिखा हूंगे पनों की नहीं हो तो भी पानूश से फिरा है सपनों में जूटे सपनों से जरा जरा सचार सचदा है जरा सचदा का जरा सचदा पर

مٹی کی کایا

مہمانِ مٹی

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مٹی کی کایا by مہمانِ مٹی | EchoLoRA: Generate a Song with AI