سفرِ فنا
درویشِ سرگردان
صوفیانہ موسیقی
About
یہ کلام ایک صوفیانہ سفر کی عکاسی کرتا ہے جس میں ہارمونیئم کی گونج اور طبلے کی تھاپ پر مبنی ایک جذباتی ماحول تخلیق کیا گیا ہے۔ گانے میں تال پر مبنی تالیوں کی آواز اور گلوکار کے مخصوص میلزماتی انداز کو شامل کیا گیا ہے جو روح کو سکون اور وجد کی کیفیت میں لے جاتا ہے۔
Lyrics
दिशी शुल ज्वात लेके लोड रोठा राहु हुन तेहे को दुन्या गुलाब गले राखे दहु अप्पिया जारे स्वाधियों हुम मतेहे तू अरही प्रखावा के स्वातियों मवातेच तिन्हे ना घर में हानाके मुँ अरही स्वन्ने मौधार के स्वातियों अमिक्द जिस्वाचास प्रचिन्तास स्वामा नवधार तले काही स्वाले नपुई नही रोशु मजो अरडी स्वाले आणी स्वातियों स्वासना घर स्वार्थ मुट्टे गलने यापे गंहातोली रोशिलव पिष्टे सातियों धारमा उधरमिक रोशिस ने नघर में हाना नवधार तले काही स्वाले नपुई नही रोशु मजो अरडी स्वाले आणी स्वातियों स्वासना घर स्वार्थ मुट्टे गलने यापे गंहातोली रोशिलव पिष्टे सातियों धारमा उधरमिक रोशिस ने नघर में हाना नवधार तले काही स्वाले नपुई नही रोशु मजो अरडी स्वाले आणी स्वातियों स्वासना घर स्वार्थ मुट्टे गलने यापे गंहातोली रोशिलव पिष्टे सातियों धारमा उधरमिक रोशिस नघर में हाना उधरमिक रोशिस नघर में हाना नवधार तले काही स्वाले नपुई नही रोशु मजो अरडी स्वाले आणी स्वातियों स्वासना घर स्वार्थ मुट्टे गलने यापे गंहातोली रोशिलव पिष्टे सातियों धारमा उधरमिक रोशिस नघर में हाना उधरमिक रोशिस नघर में हाना उधरमिक रोशिस
سفرِ فنا
درویشِ سرگردان
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