महानगर का शोर
नगरी नाद
इंडियन इलेक्ट्रॉनिक
About
यह ट्रैक आधुनिक शहरी जीवन की आपाधापी को दर्शाता है, जिसमें पारंपरिक तबला तालों को भारी इलेक्ट्रॉनिक बेसलाइन और राग-आधारित सिंथेसाइज़र पैड्स के साथ जोड़ा गया है। उत्पादन में एक गहरा डिजिटल साउंडस्केप है जो भीड़ भरे शहरों की ऊर्जा और अकेलेपन के बीच के विरोधाभास को उजागर करता है।
Lyrics
हवा में घुली है धुंआ और शोरशहर की धड़कन मची है चारों ओरसपनों के पीछे भागती ये गलियाँथकी हुई हैं अब ये आँखों की पलकें
कांच की ऊंची दीवारों के साएनीचे गलियों में भीड़ के काफिले आएघड़ी की सुई पर टिकी है ये ज़िंदगीफुर्सत की शामें कहीं खो गई कहींलोहे की सड़कों पर दौड़ती रफ़्तारखुद से ही उलझा है हर एक यार
सांसों की लय में अब ज़ोर हैभीतर कहीं कोई शोर हैरुकना नहीं अब ठहरना नहींभीड़ में खुद को ही ढूँढना सही
धड़कन की गूँज में खो जाओइस शहर की रूह में सो जाओतेज़ है रफ़्तार हर एक कदममिटा दो ये फासले, मिटा दो ये ग़म
ऊपर से चमकती है कृत्रिम रोशनीनीचे अंधेरों में पिसती है चांदनीकागज़ के वादों पर लिखी है तकदीरहम सब मुसाफिर, हम सब यहाँ फकीरबत्तियाँ जलती हैं, बुझती हैं रोज़हम भी यहाँ जीते हैं बस एक खोज
ये शहर है अपना, ये अपना जहाँधूल और धुएं में ढूँढें निशांरफ़्तार की बाहों में बंधे हैं हमखुशियों के पीछे छुपे हैं ये गमये शहर है अपना, ये अपना जहाँ
खामोश गलियों में गूँजती है यादभीड़ के बीच भी है एक फरियादठहर कर देखो ज़रा आस-पाससब कुछ है अपना, बस एक एहसास
ये शहर है अपना, ये अपना जहाँधूल और धुएं में ढूँढें निशांरफ़्तार की बाहों में बंधे हैं हमखुशियों के पीछे छुपे हैं ये गमये शहर है अपना, ये अपना जहाँ
धड़कन थमी है, अब रात ढल रहीशहर की आँखों में नींद पल रहीकल फिर वही दौड़, कल फिर वही शोरहम सब मुसाफिर, किसी और की ओरकिसी और की ओर...
महानगर का शोर
नगरी नाद
Preview