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Duration3:50

महानगर का शोर

नगरी नाद

इंडियन इलेक्ट्रॉनिक

About

यह ट्रैक आधुनिक शहरी जीवन की आपाधापी को दर्शाता है, जिसमें पारंपरिक तबला तालों को भारी इलेक्ट्रॉनिक बेसलाइन और राग-आधारित सिंथेसाइज़र पैड्स के साथ जोड़ा गया है। उत्पादन में एक गहरा डिजिटल साउंडस्केप है जो भीड़ भरे शहरों की ऊर्जा और अकेलेपन के बीच के विरोधाभास को उजागर करता है।

Lyrics

intro

हवा में घुली है धुंआ और शोरशहर की धड़कन मची है चारों ओरसपनों के पीछे भागती ये गलियाँथकी हुई हैं अब ये आँखों की पलकें

verse

कांच की ऊंची दीवारों के साएनीचे गलियों में भीड़ के काफिले आएघड़ी की सुई पर टिकी है ये ज़िंदगीफुर्सत की शामें कहीं खो गई कहींलोहे की सड़कों पर दौड़ती रफ़्तारखुद से ही उलझा है हर एक यार

build-up

सांसों की लय में अब ज़ोर हैभीतर कहीं कोई शोर हैरुकना नहीं अब ठहरना नहींभीड़ में खुद को ही ढूँढना सही

drop

धड़कन की गूँज में खो जाओइस शहर की रूह में सो जाओतेज़ है रफ़्तार हर एक कदममिटा दो ये फासले, मिटा दो ये ग़म

verse

ऊपर से चमकती है कृत्रिम रोशनीनीचे अंधेरों में पिसती है चांदनीकागज़ के वादों पर लिखी है तकदीरहम सब मुसाफिर, हम सब यहाँ फकीरबत्तियाँ जलती हैं, बुझती हैं रोज़हम भी यहाँ जीते हैं बस एक खोज

chorus

ये शहर है अपना, ये अपना जहाँधूल और धुएं में ढूँढें निशांरफ़्तार की बाहों में बंधे हैं हमखुशियों के पीछे छुपे हैं ये गमये शहर है अपना, ये अपना जहाँ

breakdown

खामोश गलियों में गूँजती है यादभीड़ के बीच भी है एक फरियादठहर कर देखो ज़रा आस-पाससब कुछ है अपना, बस एक एहसास

chorus

ये शहर है अपना, ये अपना जहाँधूल और धुएं में ढूँढें निशांरफ़्तार की बाहों में बंधे हैं हमखुशियों के पीछे छुपे हैं ये गमये शहर है अपना, ये अपना जहाँ

outro

धड़कन थमी है, अब रात ढल रहीशहर की आँखों में नींद पल रहीकल फिर वही दौड़, कल फिर वही शोरहम सब मुसाफिर, किसी और की ओरकिसी और की ओर...

महानगर का शोर

नगरी नाद

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महानगर का शोर by नगरी नाद | EchoLoRA: Generate a Song with AI