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Duration3:38

महानगर का कारवां

रागशहर

इंडियन इलेक्ट्रॉनिक

About

यह ट्रैक राग भैरवी के सूक्ष्म स्वरों को आधुनिक सिंथेटिक बेसलाइन और तीव्र तबला ताल के साथ जोड़ता है। इसमें शहरी भागदौड़ की ऊर्जा को डिजिटल परकशन और वायुमंडलीय पैड्स के माध्यम से दर्शाया गया है।

Lyrics

महाओं में खुले ये कैसे रफ़ता दोड़ती एक बिना पुकार है सांसों की रढ़कन में बसता शहरे शोर भी अब अपना सायाड है उजी मार्दों के साये में सुटा है दिन तारों की चमक हो गई है इन रोशनी के बिन भीड में चलते हुए भी दिना है एक नया ही घरगारी ये कतारों में खोई है बात खिड़की उसे जंगती है ये जादूरी रात धड़कने तेज होती जाएं रिवतार में हम खोते जाएं इसमीं कांपती है करमों के नीचे पुराने खाल अब जूरते पीचे जाग उठाएं खुई जाएं जिन्दगी का करवां हम हैं मुसाबिर नबता हमना कोई निशान तुम्हे के गुबार में हकीक के हमारी है हमारी इबादत सिपनल की बतियों में रंग बतलते ख़वाब भीड़ के समंदर में इस समंदर में कौन है लाजवाबर चेहरे पर एक नकाब ऐसा जा हुआ कुछ से ही दूर कहीं खोया हुआ मशीनों की आवाज में संगीत है चुपातनाई के साए में ये सारा शर है खड़ा ठंसा गया है ये बलकल की दिखर में डूबा है हर कल सांसों की लई में ये शोर धंजाए सब कुछ है इस धुन में गुम हो जाए उपर आसमान नीचे ये जमीन का जाल है हम मुल्चे हुए है जैसे कोई बेमिसार सबाल तेज रफ़तार में सुकूम रोडते है हम इस भाग भाग में खुट को भूलते है हम ये भागती हुई सिंदगी का करवाम है मुसाफे तब ता तक कोई चांद में एक गुबार में हक्किकते हमारी है हमारी दिवार शहर सोता नहीं बस जागता रहता है शोर हर पल कुछ कहता कुछ का रहता है रफ़तार में ही है अब सारा सब रेद की है सफर चलता हुआ सफर अब सारा सफर

महानगर का कारवां

रागशहर

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