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Duration3:09

तकनीकी युग का शंखनाद

आकाशवाणी सिंथ

इंडियन इलेक्ट्रॉनिक

About

यह ट्रैक राग भैरवी के सूक्ष्म स्वरों को एक आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक बेसलाइन के साथ जोड़ता है। इसमें तबला और ढोल की जटिल तालों को सिंथेसाइज़र की तरंगों के साथ पिरोया गया है, जो तकनीकी प्रगति की ऊर्जा को दर्शाता है।

Lyrics

तारों के पार से एक संदेश आया है नहीं सुबह ने पुराना ख्वाब जगाया है शुन्यता से कुंजिती एक नई लैसमाई के चक्र में अब सब कुछ है तय लोए के धागों में प्रान भर गए मिट के पुतले अब अंबर और छू गए सोच की कतीने पंख वैला ने बढ़ला हो के हमने नए दिवार खोली अंधरी रातों में बिजली का चाल है बर्दलती दुनिया का यही तो कमाल है धर्गन की रफ़तार तेज हो रही पुरानी संजीरे सब तूट रही आखों में चमक है आधों में शक्ती बदल रही देखो आप सब की नियाती उडां भर ले धातों की रगों में दोड़ता है कि दुनिया अब नहीं है दूर जान का सागर अब मुठी में कैद है हर एक पल में एक नई सीजिद है कल जो था नामों के नाज वो हागी कद बदलती दुनिया की यही है रफायत नई सुबा नया सवेरा तक्पी की का है बस तेरा बादलते दोर में अब खो न जाये राहे देखो खुद ही है जावे गहराई में चिपी है एक नई जान मशीनों की धड़कन में बसा है जहाँ सोच की सीमा को पार कर ले तू तू खुद को फिर से तैयार कर ले तारों के पार से एक संदेश आया है नई सुबा ने पूराना ख़ब जगाया है सब कुछ बदल रहा है सब कुछ नया है कल कारा बस बढ़ते जाना है

तकनीकी युग का शंखनाद

आकाशवाणी सिंथ

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तकनीकी युग का शंखनाद by आकाशवाणी सिंथ | EchoLoRA: Generate a Song with AI