अंतर्यामी की शरण
प्रभु चरण दास
Indian Folk
About
यह गीत पारंपरिक ढोलक और हारमोनियम की लयबद्ध जुगलबंदी के साथ प्रभु की भक्ति में रंगा हुआ है। इसमें लोक संगीत की शुद्धता को बनाए रखते हुए लयबद्ध गायन और सूक्ष्म स्वर लहरियों का प्रयोग किया गया है जो मन को शांति प्रदान करते हैं।
Lyrics
ओ मनवा तू जा जाग रेसाँझ ढले अब भाग रेप्रभु के द्वारे नाम पुकारमिट जाए सब अंधियारा
माथे तिलक और हाथ में मालामन के भीतर प्रेम की ज्वालापल-पल बीते, आस न छोड़ीतेरी शरण में प्रीत है जोड़ीमिट्टी के तन में ज्योति जगाईतूने ही मुझको राह दिखाई
हे प्रभु मेरे, ओ मेरे स्वामीतू ही है अंतर्यामीचरणों में तेरे शीश नवाऊँगाकर तुझे मैं मन बहलाऊँतेरी कृपा का सागर गहराकाट दे मेरे जीवन का पहरा
सूरज डूबा, चंदा आयातारागण ने सब कुछ पायाभोर की किरणें तुझसे ही फूटींममता की डोर कभी न टूटीकण-कण में है तेरा ही डेरातू ही सवेरा, तू ही अंधेरा
हे प्रभु मेरे, ओ मेरे स्वामीतू ही है अंतर्यामीचरणों में तेरे शीश नवाऊँगाकर तुझे मैं मन बहलाऊँतेरी कृपा का सागर गहराकाट दे मेरे जीवन का पहरा
थक गया राही, पथ है अनजानातेरे सहारे ही है ठिकानादुख के बादल छंट जाएंगेसुख के सावन फिर आएंगेविश्वास मेरा तुझमें ही अटकातू ही है माझी, तू ही है नटका
हे प्रभु मेरे, ओ मेरे स्वामीतू ही है अंतर्यामीचरणों में तेरे शीश नवाऊँगाकर तुझे मैं मन बहलाऊँतेरी कृपा का सागर गहराकाट दे मेरे जीवन का पहरा
मन की प्यास बुझा दे ओ देवासफल हो जाए मेरी ये सेवातेरी शरण में मुक्ति पाऊंअब तो बस मैं तेरा हो जाऊंतेरा हो जाऊं, तेरा हो जाऊं
अंतर्यामी की शरण
प्रभु चरण दास
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