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Duration2:52

ऋतु चक्र का राग

सत्यम और लोक धुन

Indian Folk

About

यह गीत बदलते मौसमों के चक्र को समर्पित है, जिसमें ढोलक की पारंपरिक थाप और सारंगी की मर्मस्पर्शी धुन का मेल है। इसमें लयबद्ध गायन शैली का उपयोग किया गया है जो प्रकृति के क्रमिक बदलावों को एक मधुर और मौलिक लोक संगीत के सांचे में ढालती है।

Lyrics

अरे मन्वा देख वहाराई धू अरे मन्वा देख वहाराई धू अरे मन्वा देख वहाराई धू अरे मन्वा देख वहाराई धू अरे मन्वा देख वहाराई धू अरे मन्वा देख वहाराई धू अरे मन्वा देख वहाराई धू

ऋतु चक्र का राग

सत्यम और लोक धुन

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