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Duration3:34

मिट्टी की विरासत

आर्यावर्त लोक गायक

Indian Folk

About

यह गीत पारंपरिक ढोलक और सारंगी की संगत के साथ मिट्टी से जुड़े गहरे भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाता है। इसमें लयबद्ध गायन और सूक्ष्म स्वर-लहरियों का प्रयोग किया गया है जो पुरखों की यादों को जीवंत करते हैं।

Lyrics

सलित पित्तपुर की धल्दी उसने देखा सब पुराना मेरे पिता के माथे का पसिना जिस मिट्टी में गुलगा वो बीच जो उन्होंने बोया था आज बन के पेल घिला पुराना उर्खों की आँखों का सपना अब मेरी धड़कन में पल रहा बिता हुआ हर एक लमा आज फिर से मचल रहा ये विरासत मेरी ये रूका बंधन मिट्टी की खुश मैं के मेरा मन पिड़ी क्या है एक धागा मुझे से रिष्टा जुड़ता हो मेरी वाटी तू ही मेरी पहचान है तेरी कोड में ही कोड में ही मेरी जान है वो चूड़े की धीमी तकश वो चूड़े की धीमी तकश वो कहानियों का शुर खेतों की उन पगड़नियों पर उड़ता पंची चारों और दादा की वो लाटी जो आज भी घर को धामे है पुर्खों की दुआएं हवाओं के नामे है मैं तो बस एक कड़ी हूँ इस लंबी सी मारमें बीते हुए कल की चमक मेरे आज के उजाले में ये बीरासत मेरी ये रूका बंधन मिट्टी की खुश महके देरे रामर पिडिया का एक धागा मुझसे रिष्टा चोड़ता हो मेरी माटी तु ही मेरी पहचान तेरी गुण में ही गुण में ही मेरी जान है आने वाली पीडी को मैं ये बीच धमाऊंगा मिटी की इस महिमा को हर धुन में गाउंगा न मिटने वाला ये निशान जो पुर्खों ने छोड़ा है रिष्टों का ये कच्चा धागा मैंने दिल से जोड़ा है सूरत ढले तो यादा आए वो अंगन का कोन मिटी का ये परज चुकाना नहीं मुझे है खोना ये वीरासत मेरी ये लूका बंधन मिटी की खुश महके मेरा मन पिडियों का है कि धागा मुझे से रिष्टा जुड़ता हो मेरी माटी तु ही मेरी पहचान तेरी गुड में ही गुड में ही मेरी जान है

मिट्टी की विरासत

आर्यावर्त लोक गायक

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मिट्टी की विरासत by आर्यावर्त लोक गायक | EchoLoRA: Generate a Song with AI