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Duration3:44

सावन की पहली बूंद

मीराबाई की वीणा

Indian Folk

About

यह गीत पारंपरिक भारतीय लोक शैलियों में रचित है, जिसमें ढोलक की थाप और सारंगी की मर्मस्पर्शी धुन का मेल है। इसमें विरह की तड़प को लयबद्ध गायन और सूक्ष्म स्वर-लहरियों के माध्यम से अत्यंत सादगी और गहराई के साथ प्रस्तुत किया गया है।

Lyrics

इकया दूरा मासी क्या दिया देदो इकया दूरा मासी क्या दिया देदो पुको जोक चाले आक्यान पलकरा धड़कन आधन गुमसुम कोणेशन आधन बाहिर साविन मर्जुन उपसात रापान अड़बड़ हपकी सिसला उरठुया पाकण एकतनी सजवा देव आधे डोलिया नपाल आधन से उजदी है तेरी आदों की खुश्बू रूमे मेरी महक्ती है प्रिया तू कब आएगा सावन की पहले पून्द सावन को भिगो जाएगा पलके में छाय बैठी रिजासे की अब तू कब आएगा प्रिया तू कब आएगा सावन की पहले पून्द सावन को भिगो जाएगा प्रिया तू कब आएगा सावन की पहले पून्द सावन को भिगो जाएगा प्रिया तू कब आएगा सावन की पहले पून्द सावन को भिगो जाएगा पलके में छाय बैठी रिजासे की अब तू कब आएगा सावन की पहले पून्द सावन को भिगो जाएगा प्रिया तू कब आएगा प्रिया तू कब आएगा सावन की पहले पून्द सावन को भिगो जाएगा पलके में छाय बैठी रिजासे की अब तू कब आएगा

सावन की पहली बूंद

मीराबाई की वीणा

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