मेरे गाँव की गलियां
माटी का लाल
Indian Folk
About
एक पारंपरिक लोक गीत जो ग्रामीण जीवन की सादगी और माटी के प्रेम को दर्शाता है। इसमें ढोलक की थाप, हारमोनियम की मधुर धुन और सारंगी के सूक्ष्म सुरों का उपयोग किया गया है, जो एक जीवंत और प्रामाणिक लोक संगीत का अनुभव कराते हैं।
Lyrics
देखा तुझा गई रे बोल दिये हाथ अगदे सोचा तुमार क्यों डे दोल दिये हाथ अगदे सोचा तुमार क्यों डे तोड़ दिये हाथ छाड़ दे मेरी तुझे लगो ही रे तेरा किसी एहोपी कह दो जरा सास ने ये सैयां बोल दे गई आखे फिर चुले जाने अब मेरा खाके पर करदम फिर के जाने ना कोई पराया ना कोई अहने दूड़े सद्गीयां का सबसे बड़ा नूर है हुए तो पानी और पीपल की रोट जिते हैं हम शान से नहीं कोई खोट मेरे गाव की कलियां मेरा प्यारा घरबार मिट्टी के कनकल में बसा है प्यार नदियों का पानी जैसे अमित की धार जीने का ढंग ही यही है संसार जो हरू की रोट में सब लिख हो जाते धूल की थाप पर कटम थे रट पे जाते ना कोई पराया ना कोई यह दूर है साधकी ही यहां का सबसे बड़ा नूर है हुए तो पानी और पीपल की रोट है हमशान से नहीं कोई खोट मेरे गाव की गलिया मेरा प्यारा धरवार मिट्टी के कनकन में बसा है प्यार दियों का पानी जैसे अमित की धार जीने का ढंग ही यही है संसार सुरज डूपा तारा चमका घर को लोटें सब मिट्टी की इस गोड में सुखून है अब सदार है आबाद मेरा या ये गाव प्यारा खुश्यों का दीप चले हर एक सितारा मेरा गाव मेरा संसार मेरा गाव मेरा संसार
मेरे गाँव की गलियां
माटी का लाल
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