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Duration3:26

सुनहरी फसल का साज़

रामलाल और लोक धुन मंडली

Indian Folk

About

यह गीत पारंपरिक ढोलक और हारमोनियम की थाप पर बुना गया है, जिसमें फसल कटाई की खुशी को दर्शाया गया है। इसमें सूक्ष्म स्वर-लहरियां और लयबद्ध गायन का उपयोग किया गया है जो ग्रामीण भारत की जीवंत संस्कृति को जीवंत करता है।

Lyrics

शब से शुरुता मौसम ऐसा मेरे हाथों से तेरे साथों से है कहा सुकत मेरा मेरी पकी फिलामा मेरी जिनियत मेरे यूँ सब से कहा मेरे हाथों से तेरे साथों से है कहा सुकत मेरा मेरी पकी फिलामा मेरी जिनियत मेरे यूँ सब से कहा मेरे हाथों से तेरे साथों से है कहा सुकत मेरा मेरे ये जीवन नहरा है तेरे साथी जहाँ माई जेश ने देखा समये है सुकत मेरा मेरे ये जीवन नहरा है तेरे साथी जहाँ माई जेश ने देखा समये है सुकत मेरा मेरे हाथों से तेरे साथों से है कहा सुकत मेरा मेरे हाथों से तेरे साथों से है कहा सुकत मेरा शब से शुरुता मौसम ऐसा मेरे हाथों से तेरे साथों से है कहा सुकत मेरा मेरी पकी फिलामा मेरी जनियत मेरे यूँ सब से कहा मेरी जनियत मेरे यूँ सब से कहा मेरे हाथों से तेरे साथों से है कहा सुकत मेरा शब से तेरे साथों से है कहा

सुनहरी फसल का साज़

रामलाल और लोक धुन मंडली

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