यादों की चुनरी
अंगना रागिनियाँ
Indian Folk
About
यह गीत पारंपरिक ढोलक और सारंगी की गूँज के साथ रचित एक भावुक लोक रचना है। इसमें सूक्ष्म स्वर-लहरियों और लयबद्ध गायन का प्रयोग किया गया है जो विरह की तड़प को जीवंत करता है।
Lyrics
ओ साजन, ओ राही,मन की ये प्यास बुझा जा।सूखी नदिया में फिर से,सावन की घटा ले आ।
पगडंडी पर पैरों के निशान ढूंढती हूँ,तेरी राहों में हर शाम को बुनती हूँ।सूरज ढलते ही ये दिल घबराता है,तेरा चेहरा ही हर सपने में आता है।खेतों की मेढ़ों पर बैठी मैं अकेली,यादों की चुनरी ओढ़ के सहेली।
ओ मेरे मीत, तू कब आएगा?मेरा मनवा कैसे धीर बंधाएगा?बिना तेरे ये अंगना सूना लागे,जियरा मेरा बस तेरी ही राह ताके।
चूड़ियों की खनक में तेरा नाम छिपा है,माथे की बिंदिया में मेरा मान छिपा है।हवा के झोंकों से तेरा संदेशा पूछती हूँ,बंद कमरों में तेरी खुशबू ढूंढती हूँ।कितनी ऋतुएं गुजरीं, कितनी बदली हैं शामें,अब तो लौट आ, मिटा दे ये सब फासले।
ओ मेरे मीत, तू कब आएगा?मेरा मनवा कैसे धीर बंधाएगा?बिना तेरे ये अंगना सूना लागे,जियरा मेरा बस तेरी ही राह ताके।
नदी का पानी जैसे किनारों को तरसे,वैसे ही नयन मेरे तेरे बिन बरसे।काजल की रेखा में तेरा ही चित्र है,तू ही मेरा इकलौता पवित्र मित्र है।पास नहीं तो क्या, रूह में तू बसता है,ये पागल दिल बस तेरा ही रास्ता तकता है।
ओ मेरे मीत, तू कब आएगा?मेरा मनवा कैसे धीर बंधाएगा?बिना तेरे ये अंगना सूना लागे,जियरा मेरा बस तेरी ही राह ताके।
साँझ ढल गई है, दिया जला दिया है,तेरी राहों में दिल बिछा दिया है।आ जा साजन, आ जा ओ राही,तेरी यादों में ही अब है मेरी गवाही।
यादों की चुनरी
अंगना रागिनियाँ
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