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Duration3:14

मेरे आराध्य का उजियारा

राधारमण दास

Indian Folk

About

यह गीत पारंपरिक ढोलक और हारमोनियम की मधुर संगत के साथ एक गहन भक्तिपूर्ण अनुभव प्रदान करता है। इसमें सूक्ष्म स्वर-लहरियों और लयबद्ध गायन का अनूठा मिश्रण है, जो श्रोताओं को आत्मिक शांति और आराध्य के प्रति समर्पण की भावना से भर देता है।

Lyrics

मन की बिना जनकार करे तेरी भक्ती का उजियाराम मन में भरे सांसों की डोरी तुझे सोंप दी तुही किनारा तुही लहर भीगी आंखों से नाम तेरा पुकारू राहों में तेरी मैं भूल पिछा दू ना कोई अरजी ना कोई चाहत बस तेरी मुरत में खुद को निहारू अंबर की उँचाए सागर की गार आई तेरे चरणों में ही मेरी दुनिया समाई ओ मेरे आरादे तू ही आधार तेरी कृपा का आये कैसा खुमार है बेटा के तुझे गोरी जाओं ही मेरा मीत तू ही मेरा संसार है अंबर की उँचाए सागर तेरी मुरत में खुद को निहारू आई तेरे चरणों में ही मेरा ठीकाना ओ मेरे आरादे तू ही आधार तेरी कृपा का आये कैसा खुमार है बेटा के तुझे गोरी जाओं ही मेरा मीत तू ही मेरा संसार है प्रसिंग्दा है ढड़कल तेरी ही जुमना ये नाताब तो जनव से तू ही है मंजिल तू ही मुसाफिर तुझ से ही शुरू तुझ पे ही खत्म सब कुछ आरपन अब क्या बचाना तेरी चरण में ही है मेरा ठीकाना ओ मेरे आरादे तू ही आधार तेरी कृपा का आये कैसा खुमार है ये बैठा के तुझ गोरी जाओं कि मेरा अमीद तू ही मेरा संसार है तेरा ही नाम लूँ तेरा ही धान करूँ

मेरे आराध्य का उजियारा

राधारमण दास

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