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Duration2:54

गाँव की माटी

भोला चाचा और माटी राग

Indian Folk

About

यह गीत ग्रामीण भारत की सादगी और मिट्टी से जुड़ाव को दर्शाता है। इसमें ढोलक की थाप, हारमोनियम की मधुर धुन और एकतार का प्रयोग किया गया है, जो एक जीवंत और पारंपरिक लोक संगीत का अनुभव प्रदान करता है।

Lyrics

intro

मिट्टी की सोंधी महक ओढ़े,भोर का सूरज जागा है।पगडंडियों पर ओस की बूंदें,जीवन का राग जगा है।

verse

खेतों की क्यारियों में,सोना सा रंग बिखरा है।बैलों की घंटी का स्वर,दूर गगन तक उतरा है।दादी की पुरानी लोरी में,बीते कल का मेल बसा।चौपाल की उस छाँव में,सपनों का हर खेल बसा।

refrain

ओ मेरे गाँव की माटी,तू ही तो मेरा मान है।तेरी बाहों में लिपटी,मेरी हर एक पहचान है।नदियों की कल-कल में,तेरा ही मीठा गान है।

verse

पीपल की ठंडी छाँव में,पंछी का बसेरा है।शाम ढले जब चूल्हे से,धुआँ सा उठता घेरा है।हाथों की लकीरों में,मेहनत का पसीना है।इस सादगी की दुनिया में,जीना ही तो जीना है।

refrain

ओ मेरे गाँव की माटी,तू ही तो मेरा मान है।तेरी बाहों में लिपटी,मेरी हर एक पहचान है।नदियों की कल-कल में,तेरा ही मीठा गान है।

instrumental-break
refrain

ओ मेरे गाँव की माटी,तू ही तो मेरा मान है।तेरी बाहों में लिपटी,मेरी हर एक पहचान है।नदियों की कल-कल में,तेरा ही मीठा गान है।

outro

सूरज डूबा, रात आई,तारों ने ली अंगड़ाई।मिट्टी की इस गोद में,नींद बड़ी सुखदाई।गाँव मेरा, माँ जैसी,अपनी गोद में सुलाती।

गाँव की माटी

भोला चाचा और माटी राग

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