समर्पण का प्रकाश
शरण सागर
Indian Devotional
About
यह एक गहन भक्तिमय रचना है जिसमें हारमोनियम की मधुर धुन और तबले की लयबद्ध ताल का अद्भुत संगम है। यह गीत पूरी तरह से समर्पित गायन पर आधारित है, जो श्रोता को एक शांत और आध्यात्मिक अनुभव की ओर ले जाता है।
Lyrics
ओ देखे प्रभु ओ मेरे स्वामे सब कुछ तिरा मैं तो बस एक नामी मेरी संसों में तेरा ही वास है तेरी शरण में ही मेरा विश्वास है राहों में भटका था मैं खुट को ना पहचान पाया मुं कैसे जाल में हर पल मैं घबराया अब दाम की दिवारे आज गिर जाने दे तेरी करुणा की धारा खुर बुज में बह जाने दे मैं तो हुआ तेरा अब तु ही मेरा है तुझ में ही खोया ये जीवन बसेडा है तन मना पण किया मैं तो हुआ तेरा तु हुआ तु ही में में ही खोया अब जीवन बसेडा है तन मना पण किया चरणों में तेरी आज तु ही मेरा मेरा आज कुछ पर छोड़ा अब कोई ना मेरी अस्तरी रजा में ही है मेरा प्रकार जहां देखूं वहां तु कन कन में तेरा नूर तुझ से दूर रह कड़ी में हुआ था जूचू अब न कोई शिकायब न कोई अब सवल तुने ही तो समवारा मेरा तूटा हुआ हल तुने ही तो सिखाया कैसे जीवना है फकीर मिटा दी तुने प्रभू बोड़ो प्रभू का ना ना कोई तीर ते की प्यास बाद सो मेरे पास मैं तो एक दिन का लेहरों के संग बहता तु ही है मंजी मेरा जो बार मुझे कहता में टिक गया मैं खुड में अब तो तु ही बोलता मेरे दिल का हर पन्ना मैं तो हुआ तेरा अब तु ही मेरा है तुझ में ही खोया ये जीवन बासेरा है तन मनार पण किया हर पन्ना तु ही है का तेरा मैं तो हुआ तेरा तुड़ा तु ही में ही खोया ये जीवन बासेरा है तन मनार पण किया चरणों में तेरे आज तु ही मेरा मेरा आज कुछ पर छोड़ा अब कोई ना मेरी आज तेरी रजा में ही है मेरा प्ररकार तुझ में ही अंत है तुझ में ही शुरुवत तु ही मेरी सुबा तु ही मेरी रात तेरे मेरे प्रभु बस तेरा हो जाना है तुझ मेरी आज तुझ मेरी आज तुझ मेरी आज तुझ मेरी आज तुझ मेरी आज तुझ मेरी आज तुझ मेरी आज तुझ मेरी आज तुझ मेरी आज तुझ मेरी आज तुझ मेरी आज तुझ मेरी आज तुझ मेरी आज तुझ मेरी आज तुझ मेरी आज तुझ मेरी �
समर्पण का प्रकाश
शरण सागर
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