Skip to content
Duration3:31

حق کی پکار

صداے سحر

کوک اسٹوڈیو فیوژن

About

یہ گیت روایتی طبلہ اور رباب کی تھاپ کو جدید الیکٹرانک سنتھسائزر اور گٹار کے ساتھ ملا کر ایک سماجی شعور بیدار کرنے والی دھن پیش کرتا ہے۔ اس میں ووکل میلیسما اور پیچیدہ تال کا استعمال کیا گیا ہے جو کہ کوک اسٹوڈیو کے فنکارانہ انداز کی عکاسی کرتا ہے۔

Lyrics

फ्लोटिंग आता है वही जुझाते है या शिकायते वही चाहे कह दो वो साजा वो शलवा ही रुडलारों बाकली मी रामी चाहे बकिया यूं किया हुसा ही अब कब तकियों मून हिंक तूटे होए खाप सको पे बका हुसा एक आजाब हम कब तकियों अंखी मून चलिंगे अपन ही सायों से यूं कब तक ही किया हो हिं किसा दूर हमने ही पाला हो ही पाला हो ये किसी नीद है अब तू जागना होगा हद भी खाटर हमी खद ही भागना होगा हाँ साफ की पियासवी अब तू जलना होगा अस्की राहों आमी अब चलना होगा अब आमी जब पे ही वो पराणे से उसुलो यमने खुद ही तुक किये ही ये सारे भो लड़ती आरंग के पीछे जो ससकिया ही क्या वो हमारी अपनी तो हच्चिया ही तराज हूँ मिन तूल घर इंसानी ना बन्टूं फर्के बीचूं कूडल से अब काटू ये किसी मिन है अब तू जागना होगा अब की खातर है में खुद ही भागना होगा असाफ की पियस्वी अब तू चलना होगा स्कीरा हूँ आमी अब चलना होगा अब तू जागना होगा कहा ही जागना होगा अब तू चलना होगा अमदल की मौल की खिल गिन बागी आचावली पश्टे पकिया या मरसली आगावी आगियावगी कब तक की यूँ अन्खिन तू जागना होगा अमदल की मौल की खिल गिन बागी आचावली पश्टे पकिया या मरसली आगावी

حق کی پکار

صداے سحر

Preview

حق کی پکار by صداے سحر | EchoLoRA: Generate a Song with AI