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Duration3:05

تیری ذات کا اجالا

روحانِ قوالی

کوک اسٹوڈیو فیوژن

About

یہ ٹریک ایک گہرا روحانی فیوژن ہے جس میں روایتی قوالی کے انداز کو جدید الیکٹرانک بیٹس اور رباب کی سریلی دھنوں کے ساتھ ملایا گیا ہے۔ اس میں صوتی طبلہ اور پیچیدہ تال کا امتزاج ہے، جس کے ساتھ گلوکار کی پر اثر اور پرکشش آواز میں ووکال میلیسما کا استعمال کیا گیا ہے۔

Lyrics

अब के ही हाथ में है तक्दीर की चंदनी पर अब के हाथ में है तक्दीर कतीर और आप रहो कबिले जुनू की रहुनकों का ये कबिले कईया की तस्वीर जैसा हो नसीब वैसा आपके करीब जो है अब सख्त खौफ में जो है वोही कश्म है वोही तक्दीर में तो हे हे अवल तो हे हे अखन तीर ही जाद है मेरी हर थाउड़ा कुनी सर्फ तीर ही बोते मुट जाए हस्ती बस तीरा इश्क बो गिर हे तीरे दर पैसर चहकाए मेरी ये काइनाथ है ने तो जरहों तो हे समंडर की गहराई धीरी अलफट ने मज़ को खुद से हे मलवाई खाली हाथ आया तहा बरके ले जाओ इन काथीरे तरम की बारश मज़ पे हों बरसाई कुछ बारश मज़ पे हों बरसाई कुछ बारश मज़ पे हों बरसाई कोई दुनिया की चाहत कोई रंग ना बहाई बस तीरी दीद की पियास तेल मी है चाहे दर्द मी न भी सुकून तीरा नाम लीने से मल तीरे सच दे मी है मेरी रूह मस कराओ है तो ही तो है हर सू तो है है मेरी हस्ती का मुहूर बस तो ही तो है है अश्किया प्याग मीजल के खंडन होई हमाब हर सरा मीरे अंदर तीरा ही तो है तीरा ही नाम मेरी जबन पर है तीरा ही अश्क मेरी रगूमी बहस जद कबूल हाँ यह तजा है मेरी लाग तीरी रजामी तीरी रजामी तीरी रजामी तीरी रजामी तीरा दिल दहीर है

تیری ذات کا اجالا

روحانِ قوالی

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