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आईने का सच
Duration3:28

आईने का सच

ज़ाहिर ज़मीर

Indi-Pop

About

यह गीत एक आधुनिक इंडि-पॉप रचना है जिसमें सितार की मधुर धुन और सिंथेसाइज़र का मिश्रण है। इसमें ढोलक की लयबद्ध ताल और एक आकर्षक वोकल हुक है जो आत्म-खोज की यात्रा को दर्शाता है।

Lyrics

intro

हवाओं में अपना पता ढूंढता हूँआईने में खुद को ज़रा ढूंढता हूँये चेहरा, ये आँखें, ये मेरी कहानीकिस मोड़ पर मैं कहीं खो गया था

verse 1

बचपन की गलियों में दौड़ती धूप थीहाथों में मेरे खुली कोई किताब थीतब कोई नाम मेरा, ना कोई पहचान थीबस एक हँसी थी और बेफिक्र उड़ान थीलोग कहते थे जैसा, मैं वैसा ही ढल गयाभीड़ की इस चाल में मैं खुद से ही जल गया

pre-chorus

अब आईना बोलता है, मैं कौन हूँ?सवालों के घेरे में क्यों मौन हूँ?ये मुखौटे जो पहने, अब भारी लगने लगेसपनों के धागे धीरे-धीरे टूटने लगे

chorus

मैं तो एक खुली किताब, पन्ने मेरे अनकहेमैं वो रास्ता हूँ जो मंज़िल तक ना गएमेरी पहचान, मेरी अपनी ही रूह हैखुद को पाने की ये एक छोटी सी जुस्तजू हैमैं हूँ वही, जो मैं बनना चाहता हूँअपनी ही लहरों में अब बहना चाहता हूँ

verse 2

नक्शों को छोड़ा, अब राह खुद चुनूँगादिलों की धड़कन को ध्यान से सुनूँगाना किसी की बंदिश, ना किसी का ये शोर हैमेरे अंदर ही तो छिपा सारा ज़ोर हैजो लोग कहते थे, वो बातें पुरानी हो गईंमेरी अपनी सोच अब मेरी कहानी हो गईं

pre-chorus

आईना अब हँसता है, मैं निखर गयाभीड़ से हटकर मैं खुद से ही मिल गयाये पहचान मेरी, मेरी अपनी ही साँस हैमुझमें ही बसी अब मेरी पूरी कायनात है

chorus

मैं तो एक खुली किताब, पन्ने मेरे अनकहेमैं वो रास्ता हूँ जो मंज़िल तक ना गएमेरी पहचान, मेरी अपनी ही रूह हैखुद को पाने की ये एक छोटी सी जुस्तजू हैमैं हूँ वही, जो मैं बनना चाहता हूँअपनी ही लहरों में अब बहना चाहता हूँ

bridge

ज़रा रुक के देख तो, ये रंग कितने हसीन हैंमेरी अपनी दुनिया में, सब कितने करीब हैंना कोई डर, ना कोई अब शिकवा रहामैं खुद में मुकम्मल, मैं खुद में ही जा रहा

chorus

मैं तो एक खुली किताब, पन्ने मेरे अनकहेमैं वो रास्ता हूँ जो मंज़िल तक ना गएमेरी पहचान, मेरी अपनी ही रूह हैखुद को पाने की ये एक छोटी सी जुस्तजू हैमैं हूँ वही, जो मैं बनना चाहता हूँअपनी ही लहरों में अब बहना चाहता हूँ

outro

अब मैं हूँ, बस मैं हूँअपनी पहचान में ही, मैं मुस्कुराता हूँखुद से मिल गया हूँअब मैं खुद को ही अपनाता हूँ

आईने का सच

ज़ाहिर ज़मीर

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