आईने का सच
ज़ाहिर ज़मीर
Indi-Pop
About
यह गीत एक आधुनिक इंडि-पॉप रचना है जिसमें सितार की मधुर धुन और सिंथेसाइज़र का मिश्रण है। इसमें ढोलक की लयबद्ध ताल और एक आकर्षक वोकल हुक है जो आत्म-खोज की यात्रा को दर्शाता है।
Lyrics
हवाओं में अपना पता ढूंढता हूँआईने में खुद को ज़रा ढूंढता हूँये चेहरा, ये आँखें, ये मेरी कहानीकिस मोड़ पर मैं कहीं खो गया था
बचपन की गलियों में दौड़ती धूप थीहाथों में मेरे खुली कोई किताब थीतब कोई नाम मेरा, ना कोई पहचान थीबस एक हँसी थी और बेफिक्र उड़ान थीलोग कहते थे जैसा, मैं वैसा ही ढल गयाभीड़ की इस चाल में मैं खुद से ही जल गया
अब आईना बोलता है, मैं कौन हूँ?सवालों के घेरे में क्यों मौन हूँ?ये मुखौटे जो पहने, अब भारी लगने लगेसपनों के धागे धीरे-धीरे टूटने लगे
मैं तो एक खुली किताब, पन्ने मेरे अनकहेमैं वो रास्ता हूँ जो मंज़िल तक ना गएमेरी पहचान, मेरी अपनी ही रूह हैखुद को पाने की ये एक छोटी सी जुस्तजू हैमैं हूँ वही, जो मैं बनना चाहता हूँअपनी ही लहरों में अब बहना चाहता हूँ
नक्शों को छोड़ा, अब राह खुद चुनूँगादिलों की धड़कन को ध्यान से सुनूँगाना किसी की बंदिश, ना किसी का ये शोर हैमेरे अंदर ही तो छिपा सारा ज़ोर हैजो लोग कहते थे, वो बातें पुरानी हो गईंमेरी अपनी सोच अब मेरी कहानी हो गईं
आईना अब हँसता है, मैं निखर गयाभीड़ से हटकर मैं खुद से ही मिल गयाये पहचान मेरी, मेरी अपनी ही साँस हैमुझमें ही बसी अब मेरी पूरी कायनात है
मैं तो एक खुली किताब, पन्ने मेरे अनकहेमैं वो रास्ता हूँ जो मंज़िल तक ना गएमेरी पहचान, मेरी अपनी ही रूह हैखुद को पाने की ये एक छोटी सी जुस्तजू हैमैं हूँ वही, जो मैं बनना चाहता हूँअपनी ही लहरों में अब बहना चाहता हूँ
ज़रा रुक के देख तो, ये रंग कितने हसीन हैंमेरी अपनी दुनिया में, सब कितने करीब हैंना कोई डर, ना कोई अब शिकवा रहामैं खुद में मुकम्मल, मैं खुद में ही जा रहा
मैं तो एक खुली किताब, पन्ने मेरे अनकहेमैं वो रास्ता हूँ जो मंज़िल तक ना गएमेरी पहचान, मेरी अपनी ही रूह हैखुद को पाने की ये एक छोटी सी जुस्तजू हैमैं हूँ वही, जो मैं बनना चाहता हूँअपनी ही लहरों में अब बहना चाहता हूँ
अब मैं हूँ, बस मैं हूँअपनी पहचान में ही, मैं मुस्कुराता हूँखुद से मिल गया हूँअब मैं खुद को ही अपनाता हूँ
आईने का सच
ज़ाहिर ज़मीर
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