Skip to content
Duration2:51

अखंड एकत्व

अनंत प्रकाश दास

भारतीय भक्ति संगीत

About

यह रचना पारंपरिक भारतीय भक्ति संगीत की गहराई को दर्शाती है, जिसमें हारमोनियम और तबला का सुरीला संगम है। राग-आधारित स्वर-लहरियाँ और लयबद्ध ताल एक आध्यात्मिक वातावरण का निर्माण करते हैं, जो ब्रह्मांडीय एकता के भाव को उजागर करते हैं।

Lyrics

हिबद से नाश है शामन दिन में तेरा नूर है जाया शुने से उपसारा संसर तो ही आरी तो ही अंतकारा शाम की लहरों में तेरा ही सपंदन है शास में ढड़के तेरा ही वंदन मिट्टी लिपटी है तेरी माया हमने तो बस तेरा ही रूप है पयान कोई अपना न कोई पढ़ाया एक ही जोती ने सब को सजाया सब एक है हम एक ही धागे में पिरोए तेरी रजाम सोए और कोई मिट जाए दुरिया ये भिर सब मिट जाए तेरी एक राम जाए तू ही है विस्तार नब के तारों में तेरी ही चमक है हर एक खिड़ाये में तेरी ही धमक है तनी भी राम सब कुछ तक ही जाती तू ही है सुबा और तू ही है राती रत का रंग हर और और चाड़ा है तू ही तो हर एक रूप में खड़ा है सब एक है हम एक ही धागे में पिरोए तेरी रजाम सोए और खोए मिट जाए तो निया ये भेद सब मिट जाए तेरी एक दाम जाए तू ही है विस्तार तू ही है विस्तार प्राणिक चूठा सापथर स्वयं इस वयं में समाया है तू ही किनारा तू ही है सहारा एक अठव की उंजाब चारों और छाए तेरी ही हस्ती ने ये रीत बनाया हूँ तू ही है प्राणिक चूठा सापथर स्वयं इस वयं में समाया है

अखंड एकत्व

अनंत प्रकाश दास

Preview