सांवरिया का धाम
बंके बिहारी जोशी
भारतीय भक्ति संगीत
About
यह गीत पारंपरिक हारमोनियम और तबले की थाप पर आधारित एक भक्तिमय रचना है। इसमें राग-आधारित मधुर स्वर-लहरियाँ और आध्यात्मिक समर्पण का भाव समाहित है, जो श्रोता को एक शांत और ध्यानमग्न अवस्था में ले जाता है।
Lyrics
लिप्स का लक्ष्मी यारूं का नाम हथों में है जादू अंधेरे भी हैं गुलाल है वो जिनसा जिनका पहाड बैलों की बोल कॉट से गिया तिखाल तू है तेन हाई गड मेरा हर चोपरे सिन हाथ किशुला कहता मैं जंग शबर से खटा फुलास में बुलाई दया से भुशत दिना से ठिका नैनों के बादा पुराई और कैसा किसमत से मुलायत प्रेम से जाना शिर्मा से तले शर्मा मत से सुन चोपरे के टिकड तु सन भाईया ना सुन तेरी तयारी दुस्तों से मुलाई अतिमान का बहाना किसमत की नई दुशा सी सच से जिनका वैज मैं तेरी लचना लवज से बुल मुस्कुराते यूं यूं तेरे हिंदिन बाओं से भिंचा श्पूल से भिंचा जीवन से मुस्काना हेरा से जिनको ब्राम्ग से दरा आदिये से भिंचा प्रेम से चुका श्लेट कॉर्टर देखता चोपरे हतों में दिला चित किसमत से सुन चर्चे है पार लेकर ये जुटाई लफस से दिन दिल से सुन भाईया ना सुन नेनों के वादा पुराई और कैसा किसमत से मुलाई अद प्रेम से ये जाना शर्मा से तले शर्मा मत से सुन चोपरे के टिकर तू सुन भाईया ना सुन चिंकीस रास्तात वाचेश सुन पर सिद्रों में सुन सुन सुंक से रथे वहीरे चार उठ तया से बना जहड जे तेरी भी गिट से सुन ना ही गीत रे बस आयों ना सुन सुन पुराई बो तू सुन से ना सुन लैनों के वादा पुराई और पैसा खिस्मत से मुलायत प्रेम से ये जाना शर्मा से तले शर्मा मत से सुन चोपरे के टिकर तू सुन भाईया ना सुन जिनकी से ग्यान वो लिंक से हावा रागों से हिर्मा जेंगन से जवाहच शर्मा से और लब्स देख तो सभी जहड़ तेरी बाती गुलाल से नहीं ना ही गीत रे बस आयों ना सुन सुन पुराई बोल तू सुन से ना सुन लैनों के वादा पुराई और कैसा इस मत से मुलाये तो प्रेम से जाना
सांवरिया का धाम
बंके बिहारी जोशी
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