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Duration3:47

शून्य का साज़

पंडित शांतिसागर व्यास

भारतीय भक्ति संगीत

About

यह रचना राग आधारित सुरों और पारंपरिक तबला-हारमोनियम की जुगलबंदी से सजी है, जो मन की शांति को समर्पित है। इसमें गायन की शैली को एक मंदिर के शांत वातावरण के अनुरूप रखा गया है, जहाँ ध्वनि का हर स्पंदन आध्यात्मिक गहराई को दर्शाता है।

Lyrics

intro

मन की लहरें शांत हुई हैंभीतर एक दीप जला हैसब कुछ मौन है सब कुछ शून्य है

verse

बाहर की शोर भरी दुनियापल भर में ओझल हो गईजो उलझन थी मन के भीतरवो बूंद बनकर ढल गईन कोई आशा न कोई बंधनन कोई कल न आज हैसांसों की इस मद्धम गति मेंखुदा का ही साज़ है

chorus

भीतर के इस सागर में अब लहरें नहीं उठती हैंआत्मा की इस गहराई मेंसब उलझनें सिमटती हैंशांति का ये अमृत कण-कणमेरे तन में घुलता हैबंद थे जो द्वार हृदय केअब वो दर खुलता है

instrumental-interlude
verse

न कोई पाने की हसरत हैन कोई खोने का डर हैजो भी था वो सब यहीं हैये कैसा सुंदर सफर हैआंखें मूंदूं तो दिखता हैएक नूर का फैला नूरदुनिया की इस भाग-दौड़ सेमैं हो गया कितना दूर

chorus

भीतर के इस सागर में अब लहरें नहीं उठती हैंआत्मा की इस गहराई मेंसब उलझनें सिमटती हैंशांति का ये अमृत कण-कणमेरे तन में घुलता हैबंद थे जो द्वार हृदय केअब वो दर खुलता है

climax

तृप्ति का ये भाव अनोखारोम-रोम में छा गयामेरा मैं ही मुझमें खोकरमुझको ही फिर पा गयाअनंत की इस गोद में सोयामन अब जाग उठा हैप्रेम का ये शीतल झरनाभीतर ही उमड़ उठा है

outro

सब कुछ शांत हैसब कुछ मौन हैमैं ही मैं हूंऔर ये मन भी मौन हैशांति ही सत्य हैशांति ही मुक्ति है

शून्य का साज़

पंडित शांतिसागर व्यास

Preview

शून्य का साज़ by पंडित शांतिसागर व्यास | EchoLoRA: Generate a Song with AI