समर्पण का द्वार
महंत प्रेमानंद
भारतीय भक्ति संगीत
About
यह गीत एक गहन भक्तिपूर्ण अनुभव है, जिसमें तबला और हारमोनियम का मधुर मेल है। राग आधारित धुनों और स्पष्ट गायकी के माध्यम से यह ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण की भावना को उजागर करता है।
Lyrics
हिब से तो पर आश्ख लहरा रही है किसमत की राह सुराज से नो सोचो खुश्बू की आचल पे गुजरे है रख कोई बैठे पेर हुश है ना बूरा हिब से तो पर आश्ख लहरा रही है किसमत की राह सुराज से नो सोचो खुश्बू की आचल पे गुजरे है रख कोई बैठे पेर हुश है ना बूरा हिब से तो पर आश्ख लहरा रही है किसमत की राह सुराज से नो सोचो किसमत की राह सुराज से नो सोचो खुश्बू की आचल पे गुजरे है रख कोई बैठे पेर हुश है ना बूरा हिब से तो पर आश्ख लहरा रही है किसमत की राह सुराज से नो सोचो खुश्बू की आचल पे गुजरे है रख कोई बैठे पेर हुश है ना बूरा हिब से तो पर आश्ख लहरा रही है किसमत की राह सुराज से नो सोचो खुश्बू की आचल पे गुजरे है रख कोई बैठे पेर हुश है ना बूरा हिब से तो पर आश्ख लहरा रही है हिब से तो पर आश्ख लहरा रही है किसमत की राह सुराज से नो सोचो खुश्बू की आचल पे गुजरे है रख कोई बैठे पेर हुश है ना बूरा हिब से तो पर आश्ख लहरा रही है किसमत की राह सुराज से नो सोचो खुश्बू की राह सुराज से नो सोचो खुश्बू की राह सुराज से नो सोचो खुश्बू की राह सुराज से नो सोचो
समर्पण का द्वार
महंत प्रेमानंद
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