मैं मिटा तू बचा
संत नूरानंद
भारतीय भक्ति संगीत
About
यह रचना अहंकार के त्याग और आत्म-साक्षात्कार पर आधारित एक गहरा भक्ति गीत है। इसमें तबले की धीमी थाप और हारमोनियम के राग-आधारित सुरों का उपयोग किया गया है, जो श्रोता को ध्यान की अवस्था में ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
Lyrics
मिटती हुई पहचान की आहटखोता हुआ ये नाम मेराशून्य में विलीन होने की तैयारी
मैं और मेरा का ये घेराकब तक ढोऊँ बोझ ये साराअहंकार की दीवारें पिघलींजब से मिला वो नूर तुम्हारान मैं हूँ कोई, न मैं रहूँगाबस एक लहर, सागर का किनारा
मिट गया हूँ मैं, बस तू ही बचाअस्तित्व का ये जाल, सब है झूठातू ही है साक्षी, तू ही है धारामैं तो बस एक धुंधला सा किनारासब खो गया, सब मिल गयाअहंकार का ये बंधन खुल गया
नाम की छाया, रूप का भ्रमसब ओझल हो जाए अब तोजहाँ था मैं, वहाँ खालीपनसत्य का सूरज चमके है जब तोपकड़ के बैठा था जो मुट्ठी मेंवो रेत फिसल गई उंगलियों से अब तो
अहंकार का ये काँच टूटामैं का ये अहंकार छूटाना कोई मेरा, ना मैं किसी काअस्तित्व का ये बंधन छूटाअस्तित्व का ये बंधन छूटास्वयं में स्वयं का मिलन हुआ!
शून्य में विलीन, मैं शून्य हुआन कोई पहचान, न कोई नामबस तू ही तू, बस तू ही तूपूर्ण विश्राम, पूर्ण विश्राम
मैं मिटा तू बचा
संत नूरानंद
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