शून्य से पूर्ण तक
कृष्णकांत दास
भारतीय भक्ति संगीत
About
यह गीत एक गहन आध्यात्मिक यात्रा है, जिसमें हारमोनियम और तबला का पारंपरिक तालमेल राग-आधारित स्वर-लहरियों के साथ बुना गया है। इसमें गायक की आवाज़ में पूर्ण समर्पण और शांति है, जो श्रोता को ध्यान और भक्ति की गहराई में ले जाती है।
Lyrics
मैं हारा जग से, अब तेरी शरण में आयाअस्तित्व मेरा, तेरे चरणों में समायाजो भी था मेरा, अब सब तेरा ही तो हैमिट गई मैं, बस तू ही तू मुझमें छाया
अहंकार की ये दीवारें ढहने लगी हैंप्यास मेरी अब सागर में बहने लगी हैन कोई चाहत, न अब कोई बंधन रहातेरी राहों में ही, मेरी मंज़िल बहने लगी हैतू ही आधार मेरा, तू ही किनारामेरे जीवन का तू ही एक सहारा
मैं मिट गया हूँ, तुझमें ही खो गया हूँतेरी रज़ा में, मैं अब सो गया हूँसौंप दिया है, ये जीवन तुमको ही मैंनेतेरे चरणों का अब, मैं दास हो गया हूँ
न मैं हूँ ज्ञानी, न कोई तपस्या की मैंनेतेरी दया की, बस एक ही रीत है देखीजो आया द्वार तेरे, वो कभी न लौटा खालीतूने हर पीड़ा, हर मुश्किल है झेलीमेरी साँसों में बस, तेरा ही नाम गूँजेजैसे भंवर कोई, दरिया में ढूँढे
सब कुछ समर्पण, न कुछ भी छुपायातेरे प्रकाश ने, अंधियारा मिटायामैं शून्य हुआ, तूने पूर्ण बनायामुझमें ही तूने, अपना घर बसायाअब न कोई दूरी, न कोई परायासब में है तू, ये मैंने पाया
मैं मिट गया हूँ, तुझमें ही खो गया हूँतेरी रज़ा में, मैं अब सो गया हूँसौंप दिया है, ये जीवन तुमको ही मैंनेतेरे चरणों का अब, मैं दास हो गया हूँ
तू ही सत्य है, तू ही मेरा आधारतेरी शरण में, मिला मुझे प्यारअब सब तेरा, बस तू ही तूसमा गया मुझमें, तू ही तूतू ही तू... तू ही तू...
शून्य से पूर्ण तक
कृष्णकांत दास
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