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Duration3:06

शहर की दौड़

नीली रफ्तार

इंडि-पॉप

About

यह गीत आधुनिक इंडि-पॉप शैली में रचित है, जिसमें पारंपरिक तबले की थाप और आधुनिक सिंथेसाइज़र का अनूठा मिश्रण है। इसकी धुन में एक शहरी उदासी और भागदौड़ भरी जिंदगी की सच्चाई को खूबसूरती से पिरोया गया है, जो सुनने वाले को एक अलग ही दुनिया में ले जाती है।

Lyrics

intro

नीली रोशनी में डूबी ये शाम,तेज रफ्तार में खोया मेरा नाम।धुंधली गलियों में ढूंढूं मैं क्या,खुद से ही पूछूं ये कैसा मकाम।

verse

कांच की ऊंची दीवारों के पार,घड़ियों की सुई में सिमटा संसार।भीड़ में चलते, मिलते नहीं हम,ख्वाबों के पीछे है कैसा ये भार।कॉफी की खुशबू में सुबह का शोर,सपनों के पीछे दौड़ती है डोर।

pre-chorus

मेट्रो की धुन में खोई सी सांसें,कल की फिक्र में बीतती रातें।खिड़की से झांकती है ये रूह,ढूंढे कहीं वो पुरानी वो बातें।

chorus

ये शहर है मेरा, ये दौड़ है मेरी,ख्वाहिशों की चादर में लिपटी है तेरी।तेज हवाओं में उड़ती है बातें,इस भीड़ में भी हम साथ हैं, क्या ये है तेरी?

verse

सड़कों पे दौड़ती ये लाल बत्तियां,सबके हैं अपने अलग ही जतन।किसको खबर है कौन है मुसाफिर,किसके लिए है ये सारा बदन।फोन की स्क्रीन पर दुनिया है सिमटी,अपनों से दूर है ये कैसा चलन।

chorus

ये शहर है मेरा, ये दौड़ है मेरी,ख्वाहिशों की चादर में लिपटी है तेरी।तेज हवाओं में उड़ती है बातें,इस भीड़ में भी हम साथ हैं, क्या ये है तेरी?

bridge

छत पर खड़े होकर देखूं जो नीचे,सब कुछ है आगे, सब कुछ है पीछे।क्या पाया हमने, क्या खोया है हमने,सवालों के घेरे में उलझे ये जी-ए।

chorus

ये शहर है मेरा, ये दौड़ है मेरी,ख्वाहिशों की चादर में लिपटी है तेरी।तेज हवाओं में उड़ती है बातें,इस भीड़ में भी हम साथ हैं, क्या ये है तेरी?

outro

तारों की छांव में सोता है शहर,कल फिर जगेगा ये होकर निडर।हम भी चलेंगे नई राहों की ओर,खामोश दिल में है उम्मीद का शोर।उम्मीद का शोर।

शहर की दौड़

नीली रफ्तार

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