बचपन की गलियां
स्मृति शर्मा
इंडि-पॉप
About
यह गाना एक मधुर इंडि-पॉप रचना है जो एकॉस्टिक गिटार की कोमल धुनों और आधुनिक सिंथेसाइज़र के मिश्रण से बनी है। इसमें तबले की हल्की थाप और एक लयबद्ध ताल का उपयोग किया गया है जो बचपन की यादों को ताज़ा करने वाली एक भावुक यात्रा का अनुभव कराती है।
Lyrics
ओ वे भिक्र चलना सब कुछ धुंदला सा पर दिल में वही है रंग बिता हुआ कल फिर से है मेरे संग का बेच की कश्टी थी बारिश का पानी था गुल्लक में चिपे सपनों की एक अलगी कहानी था दो पहर की वो निन मागी धक्की का साया बेच पंके उन पन्नों को मैंने फिर से पलता है पाया मिट्टी की वो खुशबू हाथों में लगी धूलाज भी आज है वो जो गए थे हम भूम वो मेरे बच्चपण तू फिर से आजा धूप के उस आंगन में मुझे भी ले जा वो खेल वो खेलों ने वो कच्ची सी यादे फिर से बुल ले हम वो पुरानी बातें वो मेरे बच्चपण तू फिर से आजा पंटंगों की वो डोर छट पर दौड़ना मेरा शम ठले घर आना वो तारों का टेरा दुस्तों की वो टोली वो जगडे और वो प्यार आज भी गुंजते हैं खानों में बार बार बार बिड़ी हो गई ये दुनिया पर दिल अभी भी बच्चा है जो बीद गया वो लमहा वही सबसे सच्चा है ओ मेरे बच्चपण तू फिर से आजा धूप के उस आंगन में मुझे भी ले जा वो खेल वो खेलों ने वो कच्ची सी यादे फिर से बुल ले हम वो पुरानी बाते ओ मेरे बच्चपण तू फिर से आजा ओ आज भी जब बंद करूँ आखें तो वही नजारा है वही पुराना घर वही प्यारा सा सहारा है कोई फिक्र थी नहीं कोई हिसाब था बस कुछ रने का एक अनोखा ख़वाब था काश लोट सके हम उस पे परवाद और में खो जाए फिर से उसी बच्चपण के शोर में वो मेरे बच्चपण तू फिर से आजा धूप के उस आंगन में मुझे भी ले जाओ खेल वो खेलाओने वो कच्ची से यादे फिर से बुल ले हम वो पुरानी बाते हो मेरे बच्चपण तू फिर से आजा यादे हैं ये बाते हैं दिल में बसी हैं वो मुस्काने आज भी आगों में हासी हैं फिर मिलेंगे कभी उस पुरानी गली में बच्चपण की सुप्यारी सुनेरी करी में बस यादे ही तो है जो साथ रहती है खामोश धड़तने अब भी वही कहती है
बचपन की गलियां
स्मृति शर्मा
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