मुकाम-ए-इश्क
मद्धम जादू
इंडि-पॉप
About
यह गीत एक आधुनिक इंडि-पॉप रचना है जिसमें मधुर सिंथेसाइज़र और पारंपरिक तबले का सुंदर मेल है। इसमें एक भावुक गायन शैली है जो एक रूमानी माहौल तैयार करती है, जो रेडियो-फ्रेंडली पॉप संरचना के साथ पूरी तरह से मेल खाती है।
Lyrics
वो गलियां वो दूँ वो बच्चोपन का शोरादों के जरोखों में अब भी है वो दाड़ कागजे की कश्टी बारिश का पानी दाद की कहानी में खोई थी सिंदगानी वांग के पेड़ों की ठंडी सी जगूल भारे पैरों से ना भी थे आसमाना आज भी ढूंढते हैं वही खोया जहाँ खोलुका चिपीका के वो हस्ती हुई शाम सब कुछ बदल गया बस यादे हैं का बच्चपंखी वो गलिया फिर बुलाती है मुझे मिटी की सोंधी खुश्बू ले जाती है तुझे वो मासूम सी बाते वो बेफिकर हसी वापस ले चल वही जहां थी वो खुशी वो बच्चपंखी तु कहां खुगया मेरे हाथों से वो पल सो गया चुट्टियों की दो पहर छट पर पतंग अस्पनों की रंगों में थे हम भी मलंग वो कच्चे मुकानों की दिवारे पुरानी लिखी थी वहां हमने अपनी कहानी अब भीड में खोया मैं तिनहां खड़ा हूँ बीते उन पलों के साय में पड़ा हूँ बच्चपंखी वो गलिया फिर बुलाती है मुझे मिटी की सोंधी खुशबू ले जाती है तुझे वो मासूं सी बाते थी वो बेपिक्र हसी वापस ले चल वही जहां थी वो खुशी वो बच्चपंखी तु कहां खो गया मेरे हाथों से वो कल सो गया वो बेपिक्र हसी वापस ले चल वही जहां थी वो खुशी वो बच्चपंखी तु कहां खो गया मेरे हाथों से वो कल सो गया वो बेपिक्र हसी वापस ले चल वही जहां थी वो खुशी वो खुशी वो खुशी वो खुशी वो खुशी वो खुशी वो खुशी वो खुशी वो खुशी वो खुशी वो खुशी वो खुशी वो खुशी वो खुशी वो खुशी वो खुशी वो खुशी वो खुशी व खुशी वो खुशी वो खुशी वो खुशी वो खुशी वो खुशी वो खुशी वो खुशी वो खुशी वो खुशी वो खुशी वो खुशी वो खुशी
मुकाम-ए-इश्क
मद्धम जादू
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