खुद का राही
आर्यन अद्वैत
इंडि-पॉप
About
यह गाना एक आधुनिक इंडि-पॉप रचना है जिसमें पारंपरिक तबला और ढोलक की थाप को सिंथेसाइज़र की चमकदार धुनों के साथ खूबसूरती से जोड़ा गया है। इसमें एक प्रेरणादायक संदेश है जो आत्म-खोज और सकारात्मकता को दर्शाता है, जिसे एक सुरीले वोकल हुक और पॉप-संरचित लय के साथ पेश किया गया है।
Lyrics
खोई होई राहुमे खुद को ढूल ढूल न दाईने से अनको पढ़लूम पुराने पन्नों में दबी वो बाते पुरानी लगता है जैसे थी किसी और कानी भीर में भेखोकर मैने खुद को न पाय अनजानी राहुमे बस मुझे को भटका याब रुकना है यहाँ धैर कर सोचना है जो खोगया था कहीं उसे फिर से खोजना है हवाऊ के रुपा पुराने पन्नों में दबी वो बाते पन्नों में भेखोकर मैने खुद को न पाय अनजानी राहुमे बस मुझे को न पाय अनजानी रुपा पुराने को न पाय अनजानी राहुमे बस मुझे को न पाय अनजानी रुपा पुराने को न पाय अनजानी रुपा ना कोई शिक्वा ना कोई मलाल है अब तो ये दिल बस बेमिसा जो था अंधेरा वो अब मिट रहा है सुवेरा मेरे ही संखिल रहा है मैं खुद का राही मैं खुद का ठिकाना अब और नहीं है मुझे दूर जाना अपने ही अंदर एक जहां बस गया है मेरा अक्स मुझे से ही अब हस गया हाँ मैं मिल गया हूँ खुद से ही मिल गया हूँ खुद से ही मिल गया हूँ खुद से ही मिल गया हूँ
खुद का राही
आर्यन अद्वैत
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