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Duration3:02

बीते हुए सिलसिले

शायरा मलिक

इंडि-पॉप

About

एक भावुक इंडि-पॉप ट्रैक जिसमें एकॉस्टिक गिटार और तबले का सुंदर संतुलन है। गीत की संरचना में आधुनिक सिंथेसाइज़र और एक गहरा मेलोडिक हुक है जो श्रोता को पुरानी यादों में ले जाता है।

Lyrics

भूर से चले पाँच से बड़े कदम कदम उड़े हटान पाड़े उसकी बातें सबसे जोड़े कदम कदम पहचान बड़े उसने मेरे कदम कदम पर आवाज मिला मैं सहिल पर ना पार चुनू उसने मेरे कदम कदम पर नाम निकला वो मुट्टाची बोले मुट्टाची बोले कदम कदम पर आवाज मिला मैं लूट गया ना पाता गया आर्थ सबसे न तोड़े बता दे कहां ले गई तु ये सिलसले ढुंधले है आसते अब पैसे हम मिलते ही कमी का ये शोड़ अब सहान जाए मेरा तूटा हुआ तिल्ला अब कहां तक जाए वबसा जा आजा ये दूरी अब मिठा जा शहर की भीर में मैं खुद को हूँ ढुड़ता तेरी का कोई की का ना हूँ पुछता वो चाय की तपड़ी वो लंबी सी बातें सब कुछ अधुरा है सब है पुरानी यादे कदम कदम पहचान बुड़े उसने मेरे कदम कदम पर आवाज मिला मैं सहिल पर ना पार चुन उसने मेरे कदम कदम पर ना निकड़ा वो मुट्टाची बोले मुट्टाची बोले कदम कदम पर आवाज मिला मैं लूट गया ना पाता गया रित सब से न तोड़े शायद मैं ही गलत था शायद तु भी मजबूर थी मंजल तो पास धिन पर रहे ही दुड़ती अब तो बस खामोशी का एक साया है तेरी करमो जुन्दगी ने मुझे बहुत लूलाया है बता दे कहा ले गई तु ये सिलसिले धुंधले है असते अब टैसे हम मिले तेरी कमी का ये सोड अब सहान जाए मेरा टूटा हुआ दिल्ला अब कहां तक जाए वपसा आजा आजा ये दुरिया मिठा जा यारो आजा घारवार पर पास ही लगती है मेरी सिर्फ कोई बस तूई बस तूई

बीते हुए सिलसिले

शायरा मलिक

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बीते हुए सिलसिले by शायरा मलिक | EchoLoRA: Generate a Song with AI