विरह की तड़प
उस्ताद नासिरुद्दीन खान
शास्त्रीय हिंदुस्तानी
About
यह रचना तानपुरा के गहरे ड्रोन-लेयर के साथ शुरू होती है, जो धीरे-धीरे तबला की लयबद्ध ताल और राग-आधारित मेलोडिक-इम्प्रोवाइज़ेशन में बदल जाती है। इसमें मानवीय विरह की गहराई को शास्त्रीय संगीत के शुद्ध और अकादमिक स्वरों के माध्यम से व्यक्त किया गया है।
Lyrics
भिर्मशाम के मेरे उसका परसोगी उसका परसोशी कुल्टोट मुलातराम हेलू शाम के मेरे उसका परसोगी उसका परसोशी कुल्टोट मुलातराम ताल मिट राम उसका फूल उसका फूल कुदूर ताल मिट राम उसका फूल उसका फूल कुदूर ताल मिट है जहाँ इधे रो मेरा सरा ताल मिट है जहाँ इधे रो मेरा सरा ताल मिट राम उसका फूल कुदूर उसका फूल कुदूर उसका इधे रो मेरा सरा ताल मिट राम उसका फूल कुदूर उसका फूल कुदूर उसका इधे रो मेरा सरा ताल मिट राम उसका फूल कुदूर उसका फूल कुदूर उसका फूल कुदूर उसका इधे रो मेरा सरा ताल मिट राम उसका इधे रो मेरा सरा
विरह की तड़प
उस्ताद नासिरुद्दीन खान
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