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Duration3:29

विरह की अनकही धुन

पंडित माधव विनायक

शास्त्रीय हिंदुस्तानी

About

यह रचना तानपुरा के गहरे ड्रोन-लेयर पर आधारित है, जिसमें तबला-परकशन का सूक्ष्म तालबद्ध प्रयोग किया गया है। राग-आधारित मेलोडिक इम्प्रोवाइज़ेशन के माध्यम से मानवीय विरह और प्रतीक्षा की भावनाओं को मार्मिक रूप से व्यक्त किया गया है।

Lyrics

हिव त्याग ना ख़व हर जना मिटी के भूल हिव त्याग ना ख़व हर जना मिटी के भूल हिव त्याग ना ख़व हर जना मिटी के भूल हिव त्याग ना ख़व हर जना मिटी के भूल हिव त्याग ना ख़व हर जना मिटी के भूल हिव त्याग ना ख़व हर जना मिटी के भूल हिव त्याग ना ख़व हर जना मिटी के भूल हिव त्याग ना ख़व हर जना मिटी के भूल हिव त्याग ना ख़व हर जना मिटी के भूल हिव त्याग ना ख़व हर जना मिटी के भूल हिव त्याग ना ख़व हर जना मिटी के भूल हिव त्याग ना ख़व हर जना मिटी के भूल हिव त्याग ना ख़व हर जना मिटी के भूल हिव त्याग ना ख़व हर जना मिटी के भूल हिव त्याग ना ख़व हर जना मिटी के भूल हिव त्याग ना ख़व हर जना मिटी के भूल हिव त्याग ना ख़व हर जना मिटी के भूल हिव त्याग ना ख़व हर जना मिटी के भूल हिव त्याग ना ख़व हर जना मिटी के भूल हिव त्याग ना ख़व हर जना मिटी के भूल हिव त्याग ना ख़व हर जना मिटी के भूल हिव त्याग ना ख़व हर जना मिटी के भूल हिव त्याग ना ख़व हर जना मिटी के भूल हिव त्याग ना ख़व हर जना मिटी के भूल हिव त्याग ना ख़व हर जना मिटी के भूल हिव त्याग ना ख़व हर जना मिटी के भूल हिव त्याग ना ख़व हर जना मिटी के भूल

विरह की अनकही धुन

पंडित माधव विनायक

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