मेघ मल्हार का आगमन
उस्ताद मेघराज खान
शास्त्रीय हिंदुस्तानी
About
यह रचना वर्षा ऋतु के आगमन पर आधारित है, जिसमें तानपुरा के स्थिर ड्रोन-लेयर के ऊपर बांसुरी और सितार का सूक्ष्म मेल है। इसमें तबला-परकशन का जटिल ताल चक्र और राग-आधारित मेलोडिक-इम्प्रोवाइजेशन का गहरा प्रयोग किया गया है जो प्रकृति की जीवंतता को दर्शाता है।
Lyrics
सावन की पहली बूंद ने, धरती को आज पुकारा हैसूखी हुई इन राहों में, फिर जीवन का उजियारा हैमन के कोने में छिपी, कोई पुरानी प्यास जगीबादल के काले आँचल में, मौसम ने रंग संवारा है
धूप की तपिश कम हुई, ठंडी हवा का झोंका आयापेड़ों की शाखों ने मिलकर, ऋतुओं का गीत सुनायापत्तों की सरसराहट में, छिपकर कोई बात करेबीते हुए उन लम्हों का, फिर से पता मिल पाया
रिमझिम बरसे सावन की, फुहारें मन को भिगोती हैंबदली की इन परछाइयों में, यादें खोई-खोई सी होती हैंखिल उठा फिर से उपवन, फूलों ने अंगड़ाई लीमिट्टी की सोंधी खुशबू में, रूह अब तो सोती है
सावन आया, सावन आयामन में प्रीत का दीप जलायाप्यासी धरती, तृप्त हुई अबप्रकृति ने अपना मान बढ़ाया
मौसम बदला, मन भी बदलामौसम बदला, मन भी बदलामौसम बदला, मन भी बदला
मेघ मल्हार का आगमन
उस्ताद मेघराज खान
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