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Duration3:02
स्वयं का बोध
पंडित शून्यबोध मिश्र
शास्त्रीय हिंदुस्तानी
About
यह रचना तानपुरा के गहन ड्रोन-लेयर के साथ शुरू होती है, जिसमें राग-आधारित मेलोडिक सुधार और तबला-परक लयबद्ध ताल का अद्भुत संगम है। इसमें दार्शनिक चिंतन को शास्त्रीय गायन की बारीकियों और मींड-गमक के साथ पिरोया गया है, जो एक ध्यानपूर्ण वातावरण बनाता है।
Lyrics
Satsang with Mooji Satsang with Mooji Satsang with Mooji Satsang with Mooji Satsang with Mooji Satsang with Mooji Satsang with Mooji
स्वयं का बोध
पंडित शून्यबोध मिश्र
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