तेरी यादों का मुकाम
उस्ताद इंतज़ार खान
शास्त्रीय हिंदुस्तानी
About
यह रचना तानपुरा के गहरे ड्रोन-लेयर पर आधारित है, जिसमें तबला-लय का सूक्ष्म प्रयोग और राग की गहरी भावपूर्ण प्रस्तुति की गई है। इसमें मानवीय विरह की तड़प को शास्त्रीय रागों के माध्यम से एक ध्यानपूर्ण और गंभीर वातावरण में बुना गया है।
Lyrics
साँसों की डोरी में पिरोई है एक प्यासबिन देखे जिसको, मन रहता है उदासनैनों के दर्पण में धुंधली सी एक तस्वीरकब मिलेगी वो राह, कब बदलेगी तकदीर
दूर क्षितिज पर ढलती हुई शाम हैतेरी ही यादों का अब तो मुकाम हैबुझती नहीं ये तड़प, जलता है अंतर्मनसूने पड़े हैं मेरे ये तन-मन का आँगनढूँढूँ मैं तुझको हर एक कण में यहाँतू ही है मंज़िल, तू ही है मेरा जहाँ
बूँद-बूँद करके रिसता है ये वक़्त का प्यालातूने ही तो मेरे जीवन में ये रंग ढालामृगतृष्णा सा है संसार, पर प्यास मेरी सच्चीजैसे सावन की पहली फुहार, ये चाहत है अच्छीभीतर की हलचल, ये मौन का शोरले जाए मुझे तेरी ही ओर
अधूरी सी बातें, ये टूटे से सपनेपराये हो गए हैं अब तो जो थे अपनेपर तू तो बसा है मेरी रूह की परतों मेंजैसे चाँद छुपा हो बादलों की सरहदों मेंआ जा कि अब और सहा नहीं जातातेरा इंतज़ार ही मेरा धर्म हो जाता
तू ही मेरी साँस, तू ही मेरी जानतू ही मेरी साँस, तू ही मेरी जानतू ही मेरी साँस, तू ही मेरी जान
तेरी यादों का मुकाम
उस्ताद इंतज़ार खान
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